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26.11.07

भड़ास और फुरसतिया का चरित्र---ये पहला काम विरोधियों के चरित्र हनन का करते हैं???

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भड़ास: कोई बात गले में अटक गयी हो तो उगल दीजिए, मन हलका हो जाएगा...
फुरसतिया: हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै ?
आपको अक्सर इस तरह के वाक्य दिखेंगे। ये ऊपर से बहुत ही उदार भीतर से सख्त लोग होते हैं। वे बेहद चतुराई के साथ अपने राजनीतिक विचारों को जीते हैं। वे सबसे पहला काम अपने विरोधियों के चरित्र हनन का करते हैं।
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उपरोक्त लाइनें मोहल्ला ब्लाग में दीपू राय ने लिखी है। कवि ने इन दोनों ब्लागों या इसके चलाने वालों या इसके सदस्यों का जो चरित्र व्याख्यायित किया है उसे पढ़कर मुझे वाकई आश्चर्य हुआ और थोड़ी प्रसन्नता महसूस हुई। आश्चर्य इसलिए कि अपना चरित्र साफ साफ किसी ने बताया। वैसे भी आज के युग में साफ साफ कहने वाले कितने हैं। कबीर ने कहा है ना, निंदक नियरे राखिए...। तो ऐसे बेशकीमती निंदक और सलाहकार कहां मिलते हैं। अपना या अपने ब्लाग का चरित्र जानकर प्रसन्नता इसलिए हुई क्योंकि इन दोनों ब्लागों में ही इतना दम बचा हुआ है जो शायद समीक्षा लायक लगें वरना सभी ब्लाग बेकार हैं और उनका उल्लेख उनका नाम लिए बगैर भी किया जा सकता था, वर्गीकृत करके कि हिंदूवादी और मार्क्सवादी कैटेगरी के ब्लाग होते हैं, और इतना कहते ही गप्प से ढेर सारे ब्लाग इस कैटगरी में समाहित हो जाते हैं, नाम गिनाने की जहमत से बच जाते हैं।

सोचा, अगर मोहल्ले पर भड़ास और फुरसतिया का चरित्र विवेचन (या हनन?) किया गया है तो इसे सारे भड़ासियों को भी पढ़ाना चाहिए ताकि उन्हें पता चले कि उनका ब्लाग कितना बेशकीमती है जो इस पर कविगण, लेखकगण अपने दिमागी टार्च की रोशनियां फेंकने के लिए आतुर हैं। दीपू को साधुवाद इसलिए कि उन्होंने भड़ास का नाम याद रखा और उसकी पंचलाइन को पूरा लिखा और उसकी बुद्धिभर व्याख्या की। बधाई इसलिए कि ब्लाग के दशा-दिशा पर लिखने की जहमत उठाई वरना आजकल तो लोग ब्लाग बना लेते हैं, उसके दशा-दिशा पर सोचता कौन है, किसके पास इतना टेम है कि शादी होते ही नवविवाहिता जोड़े के चरित्र को तीसरी आंख से पढ़कर उनके चाल-चलन का ऐलान कर दे। हिंदी ब्लागिंग अभी जिस इनीशियल फेज में है उसके बारे में बहस की शुरुआत करना वाकई काबिलेतारीफ काम है।

अविनाश जी को भी बधाई क्योंकि उन्होंने कवि के विचारों को अच्छे से प्रस्तुत-संस्तुत कर सबके सामने पेश किया ताकि गाली प्रकरण का पटाक्षेप होकर एक नया प्रकरण शुरू हो सके।

जय भड़ास
यशवंत

1 comment:

आशीष said...

ब्लाग की दुनिया में जिसे देखो वहीं अपने आपको खुदा समझने लगता है...दीपू भी कुछ ऐसे ही लग रहे हैं...भगवान उनका भला करे