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14.12.07

ज़िंदगी के रासायनिक समीकरण

कितना अच्छा होता !
अगर -
ज़िंदगी के समीकरण भी -
कुछ वैसे ही होते ;
जैसे रसायन शास्त्र के,
रासायनिक समीकरण।
जिससे हमें पता चल जाता -
परिणाम का,
दो विचारों के मिक्स होने के पहले ही।
काश,
हम सेट कर पाते -
अपनी उद्विग्न सोच को -
पहले से ही-
उचित "ताप और दाब" पर... ।
और हम कर पाते -'
बैलेंस -
ज़िंदगी के उलझे, कठिन-
समीकरणों को-
परिणाम और निष्पत्ति के बाद भी.

1 comment:

यशवंत सिंह said...

बढ़िया अभिषेक.....अनुभवों का रासायनिक मिश्रण नए समीकरण पैदा कर रहा है....कुछ न कुछ निकलेगा भाई....लिखते रहिए...
यशवंत