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21.1.08

"ढीठ शिरोमणि"

कल मुंबई में पांचवीं स्टैन्डर्ड चार्टर्ड मैराथन दौड़ हुई ,३३००० लोगों ने हिस्सा लिया । भारत का सबसे बड़ा खेल इवेन्ट बनाने के लिये खूब धन खर्च किया गया । हममें से बहुत सारे मुम्बईकरों को मुम्बईकर होने का गर्व है । लेकिन मैं ठहरा पनौती प्रसाद तो हमेशा गन्दी जगह ही नजरें जाती हैं । मुंबई में है एशिया का सबसे बड़ा वेश्या बाजार कमाठीपुरा, एशिया का सबसे बड़ी झोपड़पट्टी धारावी, एशिया का सबसे बड़ा पशु कत्लखाना देवनार ; मैंने पढ़ा था कि जिस जगह पर यह "स्लाटर हाऊस" है उस क्षेत्र का नाम था गोवंदे और हाट का नाम था देवनगर ;समय ने दोनो को बदल दिया गोवंदे हो गया गोवंडी और देवनगर हो गया देवनार । मैराथन का मार्ग इन जगहों से अलग रखा गया कि कहीं लोग रुक कर इनके बारे में न सोचने लगें । देश को तो मनोरंजन की जो अफ़ीम लगी है उसकी पिन्नक में यह सब दिखता नहीं और मुझे दिखता है तो खब्ती मान लिया जाता है । लेकिन कोई फ़र्क नहीं पड़ता अगर ढिठाई के लिये कोई पुरुस्कार हो तो मेरा नाम भेज कर देखो और अगर न होता हो तो यार आप लोग ही "ढीठ शिरोमणि" या "ढीठ रत्न" से नवाज़ दो । जय भड़ास...........

2 comments:

Neeraj Rohilla said...

थोडा दौड लेते तो मन को शान्ति मिल जाती और नये विचार भी मिल जाते सोचने के लिये ।

गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल' said...

WAH....WAH.....