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30.1.08

काय कराइचे...... ?

आज फिर मुझे इस बात का एहसास हुआ कि मैं किसी मायाजाल में हूं और दुनिया को जिस नजर से देख रहा हूं वह भ्रम में है । बात तो कुल मिला कर ये है कि हम कितने वर्किंग-आवर्स खर्च करके अपनी योग्यता के आधार पर कितना मालपानी कमाते हैं । आज ट्रेन मे मेरी मुलाकात मेरी मैत्रिण मनीषा (जो कि दुर्दैववश लैंगिक विकलांग है जिसे मैं आदर से दीदी कहता हूं वो ग्रेजुएट है लेकिन लोकल ट्रेन में लोगों से अपने अंदाज में अपनी टोली लेकर भीख मांगती है) से हुई ,पूरा डिब्बा निपटाने के बाद वे सब लोग मेरे पास आकर बैठ गये क्योंकि ट्रेन किसी तकनीकी समस्या के कारण रुकी हुई थी । बीमारियां सुनने और औपचारिक बातों के बाद मैंने उनसे पूछ लिया कि दीदी भीख मांगने से गुजारा होने में बहुत कष्ट होता होगा मैं आपको दवाएं कुरिअर से भेज दूंगा इस पर उन्होंने कहा,"डाक्टर भाऊ ! हमें रुपए-पैसे की कोई समस्या नहीं है भूमिका आपको भीख का अर्थशास्त्र समझा देगी ;इस पर भूमिका ने धीरे-धीरे फुसफुसाते हुए मेरे कान में बताया कि आपके सामने जो चार-पांच साल का गन्दा सा भिखारी बच्चा भीख मांग रहा है वो महीने में दस हजार से ज्यादा कमा लेता है । इसपर मेरी आंखें चौड़ी हो गईं ,मैने पूछा कि ऐसा कैसे हो सकता है ? उसने हंस कर कहा कि अगर बारह डिब्बे की या नौ डिब्बे की लोकल ट्रेन के एक डिब्बे में बैठे सौ लोगों में से एक आदमी भी इसे दो रुपया देता है तो एक ट्रेन से इसे अठारह या चौबीस रुपए मिल जाते हैं इस तरह अगर ये बच्चा दिन भर में बीस ट्रेन करता है तो इसे दिनभर में तीन सौ साठ रुपए से लेकर चार सौ अस्सी रुपए तक मिल जाते हैं और महीने में यदि ये बच्चा चार दिन की कैजुअल लीव लेता है तो कुल मिला कर छब्बीस दिनों में इसकी कमाई हो जाती है ----- नौ हजार तीन सौ साठ से लेकर बारह हजार चार सौ अस्सी रुपए...........
ये महज आंकड़ो का जोड़-घटाना नहीं बल्कि यथार्थ है जिसे भिखारी रैकेट चलाने वाले भली प्रकार से जानते हैं । भूमिका ने मुझसे कहा कि भाऊ तुम फ़िल्लम मे दिखाया हर बात को अइसा लाइटली लेने का नईं , वो मधुर भंडारकर कितना स्टडी किया ये भिखारी लोग पर तब ’ट्रैफ़िक सिग्नल’ पिच्चर बनाएला है । साथ में बैठे मेरे एक मराठी समाचार पत्र के रिपोर्टर बोले कि यार ये भीख मांगने का धंधा भी साला बुरा नहीं है कोई पूंजी नहीं लगानी पड़ती और धंधा डुबने का तो सवाल ही नहीं है । अब आप लोग ही विचार करिए कि "काय कराइचे"(यानि कि क्या करना है?).......
जय भड़ास

2 comments:

muawwar sultana said...

डाक्टर साहब आप बिलकुल सच कह रहें है ,मैं भी नई मुम्बई में ही रहती हूं और वाशी के एक नामचीन उर्दू स्कूल में टीचर हूं और लोकल ट्रेन में आते जाते रोज ही ये सब देखती हूं । आपने हिजड़ॊं की बात लिखी है क्योंकि मनीषा को तो मैं भी जानती हूं और आप तो शायद वही जनाब हैं जो पनवेल से गाड़ी पकड़ते हैं और हिजड़ो ,भिखारियों से घुल-मिल कर बातें करते हैं ,पता है आपको कि लोग आपको भी मनीषा के ग्रुप का लीडर कहते हैं और हंसी उड़ाते हैं । आप उन लोगों से दूर रहा करिए ।

डा०रूपेश श्रीवास्तव said...

प्रभु,आपसे एक बार बात हुई थी तब आप ट्रेन में थे और दुबारा बात करने की कोशिश करी तो आपके नम्बर -- ९८६७५७५१७६ से आवाज आती है किसी बहन की जो कह्ती है "रांग नम्बर" ,बताइए क्या करा जाए । मेरा नम्बर है-
९२२४४९६५५५ (पनवेल),नवी मुम्बई