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30.1.08

तेरी माँकी और सायमन्ड्स का मन्कियापा

भड़ासी गुरू सुबह से ही भयानक परेशान थे। गरिया रहे थे और नस्लभेद पर तमाम तरह की टिप्पणियां चेंप रहे थे। हम मन ही मन मु्स्कुराये और चुटकियाने के अन्दाज़ में उन्हे किलकिया दिए कि भड़ासी गुरू अब भड़ास निकालने से क्या फायदा जब अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने भज्जी को बरी कर दिया। वो बिफर गये और भज्जी की तथाकथित अभद्र भाषा की उल्टी करने लगे।

बोले- "तेरी माँकी" ही तो कहा था प्यारे भज्जी ने, मंकी तो कहा नहीं उस जटाजूट वाले उद्दंड को, अब उसे पंजाबी और हिन्दी ना आये तो भज्जी का क्या दोष?वो चालू रहे नानस्टॉप बोलते रहे- हम कब तक यूँ ही सहते रहेंगे? महात्मा गाँधी ने जिस नस्लभेद के खिलाफ ऐतिहासिक लड़ाई लड़ी उसी नस्लभेद के खिलाफ हम घुटने टेक रहे हैं। गाली देना तो ह्युमन बीईंग का नेचर है, चुनांचे भज्जी ने सिर्फ गाली का मुखड़ा बोला था, पूरी गाली नहीं ऐसे में खाली स्थान भरो की तरह ऑप्सन देना था एन्ड्रयू सायमन्डस को कि बेटा पहले भज्जी के भड़ास की मीनिंग तो बताओ?

उछलने लगे ऐसे कि जैसे सही में कपि की औलाद हों।

मैंने कहा-भड़ासी गुरू अब तो मामला दूध का दूध, पानी का पानी हो गया तो खिसियाकर वो अपना सोंटा निकाल लिए। चुटकियों से पैसों कि मुद्रा बनाते हुए बोले- अभी बताता हूँ मेरे सहनशील शिष्य॰॰ अबे तुझे नहीं पता कि सब लक्ष्मी का खेल है॰॰

मैंने फौरन चुटकी ली- कौन मित्तल जी? बोले अबे मित्तल-वित्तल नाहीं, उ जिससे मित्तल आज मित्तल हैं, मनी मनी॰॰ई सब बड़े लोगों का अपनी ओर अटेंशन लेने का तरीका है। भज्जी अन्ततोगत्वा बरी हो गये, मीडिया को भी खूब मसाला मिला लिखने को और दिखाने को। हम लोग नाहक परेशान हुए॰॰ रोज गाली देते हैं लेकिन कोई नोटिस ही नहीं लेता॰॰ तेरी माँकी॰॰॰

2 comments:

डा०रूपेश श्रीवास्तव said...

अरे भइया ,आपने तो पूरे मामले के आपरेशन को पोस्टमार्टम कर दिया । एक बार पुरजोर फिर से हम सब सुर में सुर मिला कर श्रगालों की तरह कहें......... इन सबकी माँ की ........
जय हो ।
जय भड़ास

anil kr. singh said...

ANIL ANALHATU

JIYO BALAK, TUMANE TO KAMAL HI KAR DIYA, BHADASI GURU KI BHI JAI HO, MUJHE TO PATA HI NAHI THA KI DARASAL WAH " TERI MA KI " JISE SYMONDS "MUNKY " SAMAJH LIYA.ISI SAB LOGI APAN APAN BHADAS NIKALI........... JAI HO , JAI HO BHADASI GURU KE JAI HO.