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21.2.08

दे द कड़ुआ तेल कि होरिया गईली हे भौजी...

उंगली किए हैं अपने महादेव,गुरु घंटाल औघड़ महाराज परम प्रिय महागुरु दादा भाई की चोट्टा बक चुद्दी करता है,अपोजिट टाइम पर इन्ट्री मारता है ,टेम है फागुन का और तू ''महा मृतुन्जय'' जप रहा है तो ये सोंटा भीडू लोग अप्पन से बर्दाश्त नही हुआ तो फिऊ अंगरेजी,थोरी ठेठी,लार्ज हिन्दी मगर फूल टाईट भडासी भाषा में एक चुस्त होली आइटम डालने आ गया इधर... इन्टरेस्ट लागेगा तो अगली होली में ट्राई मारना



अब होली आई त छौरा-छापारी के त आ गइनी भोज रे....भाई॥ साल भर टुकुर टुकुर....लुबुर लुबुर अलगनी पर भौजी के रंगलका कच्छा हिबते-हिबते ......मिजाएज एकदम टुन्न। .....एबरी होली आबे दे न रे छिलाटुआ ...कदीमा के लत्ती पर .......कद्दू के लत्ती पर फनिहे.... ''होरी आई रे कन्हाई भौजी तरसे बुला द दिल्ली से साई रे भाई......''

तो तीन दिन पहले से फगुनिया झोंका पूरे ताव पर था, मन्दिर वाली परती में होलिका दहन की तैयारी पूरे परवान पर थी........ ''एबरी सौंसे करारी में सबसे उन्चगर जड़ना सैन्तिहे रे छौरा...'' दहन के लिए जड़ना खोजने ,गाँव की हर गलिओं में,हर घर में सूप पीट कर घूमता हमारा वह उमर .........सच्ची आई कान्त फोरगेट कमिंग होली एभ्री इअर। होलिका दहन कथा समाप्त।
रंग रंगाए सप्तावार्नाम मादक छोरी की परमप्रिय होरी ग्रन्थ के अश्थं अध्याय का प्रसंग प्रारम्भ..... बोलो छोरी की होरी की जय ,गोरी की बल्जोरी की जय,डोरी की जोरी की जय,अंत सर्वांत डिग दिगंत अपुन भीरू लोगों की जय....

तो अखा नाईट से ही प्लान चालू हो गया था ,''धबुआ,मोहना,लाछ्ना सब साथे सुतिहे .... भोर कादो बनाबाई के छाई॥'' अब फूल नाईट नींद खल्लास ....
''कखनी होत्तई भोर हो रामा करबी हमें खोदाई ......कादो लपेस्वु रह्गीरावा के अरो देवाई पोताई
कखनी होत्तई गे फरीच सिनुरिया करबू हमें.......''
आई .......फरीच आईला मामू / बता न किसे किधर से कितना डालू .........लपेसू ......फचाक..... फुच्च... /आरे ...छ्हौरा ......कादो देलें .....तोरा नानी के... /हे बाबा एन्ना न बोला ......आरो देबो.... हे ले..... फचाक..... । बुध्धा फाएर .......तोरा दादी के रे लह्सुनिया के बेटा.... इत्ते मजाल...रुक आए गेलीओओ पोता...
छोरा -छार्पण फरार ........बुधा धोती के भीतर कोई मेक्रोमें टैप अन्दर की बात है नही डाला थो .......तो दिख गयी भीतर ........कुछ ....फिच्च से निकल गयी हंसी .....छोरन छापारी के मोर्निंग आएतम .....मूड फेरेश होलु.....हे रे बुढ़वा लेल्काऊ टेब ........चल भाग हिआं से......
अब आ गईनी इ मोहल्ला ।/ हे रे देखहि ना...उनने ....रे....उनने ....नई सुझ्लाऊ .......रे अन्हरा ....ओन्ने ...देखहि गबरुआ के कनियाँ रे... हमें त भौजी-भौजी कही छिई ....सच्ची रे...... त ..भांज लगाओ न ,तनी छुईओ के उपाय लगाओ न रे बोत्ला.....
''रुक लगवाए छिअऊ भांज...खाली बर्दाश में रहिहें...
''गबरू भैया....अहो दद्दा परनाम ....
''हाँ..हाँ परनाम ..आओ रे धबुआ .....इ भोर से होरी चालू कर देले ......अभी सौंसे दिन त रखले बारू....
''न भैया ...हम..बाल बुत्रुक बस ..आ गईनी ...उ माई भेज्ले बारन ,कहलस की भौजी से तनी कडुआ तेल मंगले आ...त आ गईनी॥
विस्फोट... प्रलय॥ आंधी..ज्वार बाजरा॥ ....ग़दर...ब्लास्ट...बमाक...धमक॥ भडास टाईप गालीगिरी चालू
'''रे..बाप..कडुआ तेल..रे॥ जुआअनखास्सा, बेल्लाज्जा..कुपातर..रविया के बेटा।'' अन्दर से बौखलाई आई एक दाईं टाईप ..लम्की भौजी .... अन्दाईजेस्ट सीचुएसन॥ ओप्पोजित पोजिसन..मामू..अपुन कन्फिउज्द ..ये क्या है कडुआ तेल में ..जे इ भ्हौजी इतनी बिदक गयी...अप्पन बायाँ दायाँ हिब्बा ..दस-बारह जनों की भीड़...बाप रे...कौने फेरा में लाए देले रे धबुआ... होरी के तेम में पिछु में गोरी ...रे.....
''आहो जगदीश....इ रविया के बेटा ...नान्र भेर के छोरा ...बेल्लाज्जा...एकरा...हे..रे तोरे ...कहलिअऊ रे....अप्पन मै-बहिन से जो न मांग न कडुआ तेल..... एकरा पाया में सिक्कर लगाओ...एककर बाप के बोलाओ....दस मिनट गया नही की प्यारा पप्पा हाजिर... अब त आगे से पलाई...पाछे से गंथाई॥ उई...माँ इ माई किधर से आई... फ़िर धार-मार=लात-घुस्सा.....थाप्पर..मुक्का ..पप्पा हो आब न... आब न गे मै ...

भीरू लोग ..अब तू ही बता न ..कैसा दल रहा .....अपन रविया के बेटा अ धबुआ के होरी... वो स्स्साला ...रंग छुडाने के वास्ते कडुआ तेल माँगा... तो तू ही समझ कर...मेरे को बता न...काहे को गान्र में बांस किया मेरे कु?कहे को होरी की मोरी में गोरी की डोरी ने खोलने दिया मेरे कु...

अप्पन अब फान जाएगा ...गोरी पर...सातों रंग डाइरेक्ट देगा...मगर नान्र पकड़ता हुं मामू .....आज के बाद कभ्भी भी ....होरी में तो और नही...कभी नही मंगिंगा ''कडुआ तेल''

तो दोस्तों, आप भी होरी में अपनी भौजी से कडुआ तेल मांग कर देखिएगा... और उसके बाद महसूस किए गए पलों लिख भेजिएगा..हम तुरंत लेंगे अपने गुरु घंटाल से राय और यूं ही बताते रहेंगे होली के शानदार टिप्स...फ़िर मिलेंगे...इसी ..कमरे में...थिक इसी टाइम...टैब तक तेल महाईए ....भौजी पताइए...

जय भड़ास

जय यशवंत

मनीष राज,बेगुसराय