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29.2.08

इनकी नंगई प्रगतिशील है, हमारी प्रतिबंधित करने लायक!!!

इरफान जी अपने ब्लाग पर एक कार्टून लगाते हैं जिसमें एक पुरुष का लिंग एक महिला खींच रही है। मेरे एक अनन्य मित्र ने बताया कि उन्होंने ज्योंही इरफान के इस कार्टून को देखा, तुरंत बंद कर दिया क्योंकि बगल में उनका बेटा भी देख रहा था। क्या इसी कार्टून के कारण इरफान के ब्लाग को बैन नहीं करा देना चाहिए?

अविनाश जी के मोहल्ले में जब महिलाओं की दशा दिशा पर बात की जाती है तो ऐसी नंगी नंगी तस्वीरों का कोलाज का रूप में इस्तेमाल किया जाता है जिसे देखते हुए कोई यह नहीं कह सकता कि ये सभ्य तस्वीरें हैं। क्या इस आधार पर मोहल्ले को प्रतिबंधित नहीं करा देना चाहिए?


नहीं, इनकी नंगई जायज है, क्योंकि ये कथित रूप से प्रगतिशील नंगई है, हिप्पोक्रेटिक नंगई है.....। इन्हें भड़ासी नंगई खराब लगती है क्योंकि हम खुलकर कहते हैं कि हम उल्टी कर रहे हैं, गंदी गंदी बातें कर रहे हैं, हम बुरे लोग हैं, हम खराब लोग हैं, हम कुंठित लोग हैं, हम सहज होना चाहते हैं, हम हलका होना चाहते हैं....


लेकिन दरअसल भड़ास इन हिप्पोक्रेटों, मठाधीशों और कथित प्रगतिशीलों के काकस में फिट नहीं बैठ रहा है, सो इन्हें गुस्सा आना लाजिमी है। दरअसल ये ब्लागिंग को पुरानों के चंगुल से निकालकर अपने चंगुल में ले आये हैं सो इन्हें यह सहन नहीं होता कि कोई ऐसा ब्लाग भी सबकी चर्चा में रहे जो इनकी जी हुजूरी नहीं करता, इनके ब्लाग के झंडे के नीचे नहीं आता, इनकी कथित प्रगतिशीलता के पैमानों पर खरा नहीं उतरता।

प्रमोद सिंह की बात इसलिए नहीं करूंगा क्योंकि मुझे वे शामिल बाजा लगने लगे हैं, जिधर ज्यादा धुन बजने लगे, उधर वो भी अपनी बांस कि पिपहरी लेकर बजाने लगते हैं, पें पें पें...हें हें हें...उन पर भगवान रहम करे।

तो भइया....आप लोग अपनी नंगई को शाब्दिक आवरणों के ढांक कर बौद्धिक बने रहो, हमें प्रतिबंधित करते रहो।

जय भड़ास
यशवंत

2 comments:

अनुनाद सिंह said...

ये तो मानना पड़ेगा कि आपने इनके ही जूते से इनको पीट दिया। ये लोग अब नंगे हो चुके हैं - वैसे ही जैसे तसलीमा प्रकरण ने सी.पी.एम को नंगा कर दिया। इनकी प्रगतिशीलता का बाजा बज गया।

हरे प्रकाश उपाध्याय said...

yshvant bhai hmari bhasa kisan-mjdooron...hk ke mare tilmilayon ki bhasa hai, achhooton ki bhasha hai unki penting...kartoon...elit baudhikon ki smjha kren