Bhadas ब्लाग में पुराना कहा-सुना-लिखा कुछ खोजें.......................

21.3.08

कुंठित संपादकों और इन्चार्जों को होली पर कई कुंतल गालियाँ

खेलें मसाने में होली दिगंबर, खेलें मसाने में होली....भड़ास के साथी लोगों, आज अपुन फिर दिल्ली वापस लौट आया. बच्चा लोग को हरिद्वार ऋषिकेश के पहाड़ पर घुमाने के बाद. लॉन्ग ड्राईव के बाद जो हालत होती है, वही मेरी भी है.

इधर भड़ास पर कई लोगों की पोस्टें देखने को मिली. सब पढ़ नहीं पाया क्योंकि इन दिनों टेम कम ही दे पाटा हूँ. बच्चा लोग हमेशा घेरे रहते हैं, सिर पर चढ़े रहते हैं.

कुछ बढ़िया सूचनाएं हैं.

एक तो ये की दो लोगों ने मुझे मेल करके ब्लॉग एग्रीगेटर बनाने का प्रस्ताव किया है. इन दोनों ही साथियों से होली बाद मुलाकात करूँगा और इक ऐसा ब्लॉग एग्रीगेटर बनाने की योजना बनाया जाएगा की हिन्दी ब्लोगिंग के मठाधीशों, चिलान्दुवों और रंगे सियारों की फट जाए और असलियत मालूम पड़ जाए.

दूसरी बात ये है कि इन दिनों ढेर सारे नए साथियों के अनुरोध आ रहे हैं कि उन्हें भड़ास ज्वाईन करना है. इन साथियों को जल्द ही निमंत्रण भेज दूंगा. उन लोगों को भड़ास ज्वाईन करने के लिए बस करना ये है कि जो निमंत्रण रूपी लिंक मेल के जरिये उन तक भेजा जाएगा, उसको क्लिक करके उसमे अपनी जीमेल कि आईडी और उसका अपना पासवर्ड दाल देन. बस हो गए भड़ास के मेंबर. अगर ज्यादे कुछ इस बारे में जानना हो तो हमारे भड़ास संचालक मंडल के साथियों से सम्पर्क कर सकते है, मेल के जरिये....

जल्द ही सभी संचालक मंडल के सदस्यों की मेल आईडी भी ऊपर दाल दी जायेगी ताकि लोग उनसे सम्पर्क कर सकें.

अंत में कहना चाहूँगा की हिन्दी मीडिया के सभी कुंठित संपादकों और इन्चार्जों को होली पर कई कुंतल गालियाँ भड़ास की तरफ़ से स्वीकार हो, अगर वे नहीं सुधरे तो अगली होली तक इन कुंठित संपादकों और इन्चार्जों की लिस्ट तैयार कर उनकी करतूतों का भड़ास पर खुलासा किया जाएगा ताकि फिर कोई कुंठित एडिटर और इंचार्ज अपने जूनियर को परेशां और तबाह न कर सके.

जय भड़ास
यशवंत

3 comments:

अनिल सिन्‍हा said...

समस्‍त कुंठित संपादकों और इन्चार्जों की लिस्ट और उनकी करतूतों का भड़ास पर खुलासा कर ही दिया जाना चाहिये क्‍योंकि इन्‍हें सुधरना तो है ही नहीं ।

डा०रूपेश श्रीवास्तव said...

दादा,आप ने ऐसी बात कह कर फ़ाड़ दी सालों की अब ये साले किसी अच्छे मोची से जानपहचान बना कर रखेंगे ताकि फ़टा हुआ पिछवाड़ा सिलवा सकें...
रोना तो अभी से शुरू हो गया है ऐसे लोगों का और फ़टने की चर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र की मधुर ध्वनि सुनाई देने लगी है....

मोहम्मद उमर रफ़ाई said...

यशवंत बच्चा, आपने जो कई कुंतल गालियां बोला है वो काफ़ी नहीं है ये तो ऊंट के मुंह में जीरे जैसी बात होगी इन लोगों के लिये इसलिये जरा क्वांटिटी बढ़ाने को बोलिये सारे भड़ासियों से.....