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30.3.08

मेनका की मनमानी


मेनका गांधी ने जिस तरह से पीलीभीत में व्यापारियाे से उनकी भैंसे छीनकार गांव वालाें में बांट दिया वह कहीं से भी उचित नहीं हैं शायद उन्हें अाज भी गांधी परिवार के हाेने पर घमंड हैा मेनका काे इसकी सजा मिलनी चाहिए जब नेता ही ऐसा करने लगे तो आम आदमी को क्या संदेश जाएगा ?

3 comments:

डा०रूपेश श्रीवास्तव said...

भाई सिंह साहब,मैं खुद पूर्वकाल में मेनका गांधी की संस्था PFA से आजीवन शुल्क भर कर जुड़ा था लेकिन इसकी ऐसी कमीनेपन की करतूतों के कारण मैंने संस्था छोड़ दी है और हां एक बात जरूर कहना चाहूंगा कि मैंने भड़ास पर एक पोस्ट भी डाली थी इस पर आप जरूर पढ़िएगा । ये औरत हद दर्जे की मक्कार और घाघ है ,मेरी तरफ़ से ऐसी बातें भड़ासियों को अजीब लग रही होंगी कि अचानक मुझे क्या हो गया लेकिन आपने इस खुजैली सी गंदी औरत का जिक्र लाकर जख्म कुरेद दिये....
सही तो तब होगा जब इसी को पट्टा डाल कर कहीं दूर जंगल में छोड़ दिया जाए ।
जय जय भड़ास

रजनीश के झा said...
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रजनीश के झा said...

Mantosh Bhai,
Roopesh bhai ka kathan ek dam sataya hai, or kutte billi ke saath janwaron ka pairokaar karne wali ye menka gandhi, kai dafe ese kukarmon ko anjaam de chuki hain. janwaron ke naam pe logon ko gumrah karne wali ye aurot na hi janwaron ki hamdard hai na hi insanon. ise bakayda antartic mahadesh main le ja ke chor dena chahiye.