Bhadas ब्लाग में पुराना कहा-सुना-लिखा कुछ खोजें.......................

20.3.08

होली के दिन दिल मिल जाते हैं........

अंकित माथुर
हिन्दी ब्लागिंग के छोटे से इतिहास में, भडास ने पता नही ऐसा क्या कर दिया की समूचे हिन्दी ब्लाग जगत में एक हलचल सी मची गई है। भारतीय परिप्रेक्ष्य में यदि देखा जाये तो हिन्दी ब्लागिंग अभी भी शैशवावस्था में ही है, और इसे कोई भी (ब्लागर्स के अलावा या शायद वो भी नही)ज़्यादा गंभीरता से नही ले रहा है। ना जाने क्यों विभिन्न एग्रीगेटरों में इस ब्लाग की लोकप्रियता को लेकर घमासान सा मचा हुआ है। पहले कुछ व्यक्तिगत मतभेद उभर कर सामने आये, फ़िर एक सामूहिक आंदोलन सा चल गया भडास को बंद करने को लेकर।
कमर्शियल रूप से एक ब्लाग पर पडने वाले हिट्स उसी ब्लाग को प्रभावित करते हैं, और यदि कोई एग्रीगेटर किसी चर्चित ब्लाग को अपने साईट पर स्थान देता है तो निश्चित ही उसका भी कुछ तो भला होगा ही। अन्यथा उसे इस प्रकार की सर्विस प्रदान करने का क्या लाभ? यदि है, तो कृपया बतायें।
हिन्दी ब्लागिंग में अब भडास अपना एक मुकम्मल स्थान बना चुका है,वो स्थान चाहे हिन्दी ब्लागिंग के स्व्यंभू खुदाओं के द्वारा बहिष्कृत कर दिये जाने के कारण हो, वैचारिक मतभेदों के कारण हो या, इसे किनारे कर दिये जाने की मुहिम के कारण,अपने तीखे तेवर या फ़िर लेखन की स्वतंत्रता को प्रोत्साहित करने की अपनी आधारभूत पृवृत्ति के कारण। हिंदी ब्लागिंग में भडास अपने आप में क्रमिक विकास की एक बडी परिघटना है। अनेक विवादों का जन्म हुआ, पटाक्षेप भी हुआ। नये लोग जुडे, पुराने हुए फ़िर यकायक किसी कारणवश ब्लाग से अलग हो गये, भडास को इस मुकाम पर पहुंचाने के पीछे यशवंत सिंह का शानदार योगदान रहा है। इस अवधि के दौरान भडास एक दिन यकायक गायब भी हुआ, लोग छटपटाये, लेकिन फ़िर एक सोये हुए शेर की मानिंद भडास जाग उठा और कईयों की नींदे उड़ गईं। बडे ही नाटकीय अंदाज़ में भडास अपने आप को एक प्रभावशाली मंच के रूप में स्थापित किया है।
अभी हाल ही में मैने देखा यशवंत सिंह ने भडास संचालक मंडल घोषित किया है, मेरे विचार से भडास के प्रत्येक सदस्य का भडास को संचालित करने के पीछे काफ़ी बडा हाथ है। लेकिन फ़िर भी यह एक स्वागत योग्य विचार है। इससे भडास को और पैनापन और दिशा मिलेगी। पहले भी कई मर्तबा इस
बात को लेकर चर्चा हो चुकी है कि भडास आखिर है क्या? भडास एक ऐसा मंच है जहां पर लोग अपने
कार्य क्षेत्र, अपनी व्यक्तिगत बातें, रोज़मर्रा से जुडी सरल या काम्प्लेक्स सभी तरह की बातें रखते हैं।
ये एक ऐसा मंच है जहां पर भिन्न भिन्न क्षेत्रों, अनुभवों, कार्यक्षेत्रों, बोलियों को बोलने वाले, अपनी अपनी भडास की अलग अलग परिभाषा रखने वाले लोग अपनी बातें लिखते पढते रहते हैं। जहां तक मेरा मानना है, उन्हे किसी को कुछ साबित नही कर के दिखाना है। जो जी में आता है लिख देते हैं।
अंत में मेरी ब्लाग एग्रीगेटरों से यही अपील है कि इस राई को पहाड ना बनाया जाये।
और किसी भी दुर्भावना से ग्रसित हो कर इसकी रेटिंग गलत सलत तरीके से ना की जाये।

आईये सभी कुछ भुला कर होली के रंगों का लुत्फ़ उठाया
जाये
होली मुबारक...होली मुबारक...होली मुबारक...होली मुबारक...

धन्यवाद...

2 comments:

हरे प्रकाश उपाध्याय said...

sahi hai ankit bhaee....

डा०रूपेश श्रीवास्तव said...

अंकित भाई,हम भड़ासी वैसे भी बुरी बातें,वैमनस्य,गमों को जल्दी ही भूल जाते हैं उसके लिये होली की जरूरत नहीं हमारे लिये हर दिन होली और हर रात दीवाली है,बस प्यार बांटते चलो.....
हमारे देश से बाहर रह रहे भड़ासी भाइयों जैसे गुलशन खट्टर साहब को विशेष तौर पर होली की शुभकामनाएं....