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17.4.08

दशानन देसाई के तीनों फोन नंबरों पर एक बार खतरे की घंटी जरूर बजाइये, थोड़ी गांधीगिरी आजमाइये

....उस सुअर अधिकारी का नाम, पता और टेलीफोन नं. लिखने को कहा है कि अगर हो सके तो उसे गांधीगिरी करते हुए फूल और गिफ़्ट भेजिये उसके कमीनेपन के व्यवहार के लिये धन्यवाद करिये-------

नाम : ए.के.देसाई
पद : चीफ़ आफ़िसर(मुख्याधिकारी)
पता: पनवेल नगर परिषद,जिला रायगढ़(नई मुंबई)-४१०२०६
फोन: ०२२-२७४५५७५१(आफ़िस)
०२२-२७४५२२०६(निवास)
०९३२४९८३३४४(मोबाईल)

Posted by मोहम्मद उमर रफ़ाई
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उपरोक्त बातें नीचे की एक पोस्ट से ली गई हैं जिसमें बताया गया है कि किस तरह एक बददिमाग अफसर देसाई ने सूचना के अधिकार कानून (आरटीआई) को हथियार बनाकर जनता की लड़ाई लड़ने वाले, सामाजिक सरोकारों वाले, जनता के पक्ष में हर हाल में खड़े होने वाले मशहूर आयुर्वेदिक डाक्टर और भड़ास के माडरेटर डा. रूपेश श्रीवास्तव के साथ सरेआम आफिस में बदतमीजी की और अपने सहकर्मियों को डाक्टर साहब की बेइज्जती करने के लिए उकसाया। अब्बा जान मोहम्मद उमर रफ़ाई भी उस वक्त डाक्टर साहब के साथ थे, जब ये बदतमीजी की जा रही थी।

मैं जब मुंबई गया था तो उस समय मैंने खुद देखा था कि किस तरह नवी मुंबई के इलाकों के विकास के नाम पर ठेकेदार, बिल्डर, अफसर, नेता, अपराधी गठजोड़ बनाकर पैसे हड़प रहे हैं। अगर इनके किये पर कोई आवाज उठाता है तो उसे ये गठजोड़ डरा धमका कर चुप कराने की कोशिश करता है। पर डाक्टर साहब ठहरे कफन बांधकर घूमने वाले औघड़, सो इन पर किसी की धमकी का कोई असर ही नहीं होता और अपने काम में ये जुटे रहते हैं।

देसाई ने जो कुछ किया वो अनपेक्षित नहीं है क्योंकि मीडिया हाउसों ने अपनी और अपने पत्रकारों की हालत ऐसी बना ही दी है कि कोई भी अफसर या नेता अब पत्रकार को दलाल से ज्यादा मानने को तैयार ही नहीं है। इसी कारण अगर देसाई ने डा. रूपेश के तेवर के आगे घबराकर आंय बांय सांय बकबका दिया हो तो कोई नई बात नहीं है। उसे तो यह भरोसा रहा होगा कि हर पत्रकार की तरह डाक्टर रूपेश भी ले देकर सेट हो जायेंगे पर रूपेश जी ठहरे बाल की खाल निकालने वाले, सो वह बेचार डाक्टर साहब के उकसावे में आ गया और लगा बकबकाने। बस उसने यही गलती कर दी। अब गलती कर दी तो उसे भुगतना भी होगा।

उपर देसाई का जो आफिस, घर का लैंडलाइन फोन नंबर दिया गया है और उसका खुद का पर्सनल मोबाइल नंबर दिया गया है, उस पर सभी भड़ासी एक बार फोन करें, और उसे कहें कि हिंदी पत्रकारों के सबसे बड़े ब्लाग भड़ास के माडरेटर डाक्टर रूपेश के साथ जो तुमने किया है, वो तुम्हारी वाट लगवाने के लिए काफी है और जल्द ही तुम्हारी वाट लगेगी। दिल्ली के पत्रकार शरद पवार से मिलकर महाराष्ट्र के ऐसा घटिया अफसर को तुरंत सस्पेंड करने की मांग करेंगे और अगर यह मांग नहीं मानी गई तो मुंबई दिल्ली के सभी पत्रकार मिलकर शरद पवार के घर के सामने धरना देंगे।

तो सभी भड़ासी साथियों, देसाई के फोन नंबरों पर इतनी घंटी बजाओ की उसे तीनों ही नंबर बंद करा देने पडें और किसी सच्चे पत्रकार से पंगा लेने के नतीजे का उसे अहसास हो सके। मैं तो हर दो मिनट में उपरोक्त नंबरों पर फोन करके उसे नमस्कार कर रहा हूं और डाक्टर रूपेश के साथ किए गए बर्ताव की सजा पाने के लिए तैयार रहने को कह रहा हूं। आप भी काम चालू रखें, साथ में सभी भड़ासी भाई हैं। देसाई जैसे कीड़े खुद ब खुद मर जाएंगे। बस इन्हें थोड़ा परेशान करने की जरूरत है।

मेरी मेल पर एक पत्रकार साथी ने कुछ यूं मेल भेजा हुआ है.....

dr.rupesh ke sath hui ghatna par pratikriya

from nitesh pal
nitesh.pal70@gmail.com

to yashwant
yashwantdelhi@gmail.com
date 16 Apr 2008 22:43
subject dr.rupesh ke sath hui ghatna par pratikriya
mailed-by gmail.com

yeshwant ji me indore or bhopal dono hi jagah reporting karta hu. or2no hi jagah rupesh ji ke sath hui ghatanajesi ghatnae aam baat he.lekin indore ke patrkaro ne iska tarika dundh rakha he.pahle latgiri.bad me gandhigiri.
apni awaz sarkar ke mukhiya tak pahuchane ke bad sarwajanik bahiskar.


Reply Forward Invite nitesh to chat


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उम्मीद है कि एक पत्रकार साथी के साथ एक अफसर द्वारा सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगे जाने के एवज में जो बदतमीजी की गई है उसका बदलना लेने को आप सभी पत्रकार साथी गांधीगिरी का रास्ता अपनायेंगे और देसाई के फोन नंबरों पर एक एक बार फोन करके उसे जरूर धन्यवाद देंगे और खुद को भड़ास का साथी बतायेंगे और ये भी कहेंगे कि उसने जो किया है अब पूरी दुनिया भड़ास के माध्यम से पढ़ रही है और उसकी वाट लगने वाली है। जल्द ही देश भर के पत्रकार दिल्ली में शरद पवार से मिलने के बाद धरना प्रदर्शन शुरू करने वाले हैं।

उम्मीद है, ये छोटा सा प्यारा सा काम आप लोग बेहद मजे में कर देंगे, और आपका ये छोटा सा काम हम लोगों के लिए एक बड़ी सफलता का पैगाम लेकर आएगा। बस यूं ही एकजुट बने रहिए, लगे रहिए....

जय भड़ास
यशवंत


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5 comments:

अबरार अहमद said...

सही कहा यशवंत भाई आपने। इस बार भडासी दिखाएंगे कि गांधीगीरी क्या चीज है। हम सब एक हैं और एक रहेंगे चाहे वह लडाई किसी भी भडासी साथी की हो। हमारी एकजुटता ही हमारी ताकत है। भले ही हम एक दूसरे से कोसों कोसों दूर पर हैं पर नई तकनीक का फायदा तो उठा ही सकते हैं। मेरी सभी भडासी साथियों से अपनी है कि एक बार जरूर उस बददिमाग अफसर को फोन करें ताकि उसका दिमाग ठिकाने आ सके।

VARUN ROY said...

मैं तो शुरू भी हो गया हूँ बड़े भाई. वैसे भी गांधीगिरी तो मेरा पसंदीदा शगल है .
वरुण राय

Anonymous said...

ek phool meri taraf se.. dono ko.. unhe bhi aur aapko bhi.. patrakar kahte hain khud ko aur ek saral si bhasha bhi nahi jante hain apni baat kahne ka..
vo to galat hai hi.. kya aap sahi hain??
mujhe pata hai ki ab aap mujhe bhi galiyan denge.. khair ham paglon ki bat nahi sunte hain..

Anonymous said...

ek phool meri taraf se.. dono ko.. unhe bhi aur aapko bhi..
patrakar kahte hain aap khud ko aur apni baat kahne ka saral bhasha gyan bhi aapko nahi hai.. vo to galat the hi to bhala aap kahan sahi hain??
mujhe pata hai ki ab aap mujhe bhi galiyan denge.. khair main paglon ki baat ka bura nahi maanta..

Anonymous said...

दादा,
हम सारे गिरी पे उतर चुके हैं बस इसको जिवंत रखना है, आपके आदेशानुसार चुतिये की चढ्ही फ़ोन से उतारी जा रही है और अब दिल्ली तमन्ना है की गधे की गांड को बिना चढ्ही के गधे पे बिठा के ताजपोशी कर दी जाए।
सो इस गोडसे की नाजायज औलाद को उसकी औकात बताना कैसी है ये तय करो बस।

जय जय भडास.