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29.5.08

लीडर को आम जलसे में गैंडे की खाल दी

हास्य गजल
जालिम ने देस्ती की वो बढिया मिसाल दी
खटिया भी अपनी कल मेरे आंगन में डाल दी
इक हादसे में कट गई कल जेब यार की
लेकर तलाशी रूह हमारी खंगाल दी
दिखलाया धूमधाम से पब्लिक ने आईना
लीडर को आम जलसे में गैंडे की खाल दी
महबूब को ये सोचा था कुल्फी खिलाएंगे
कुल्फी के रेट ने तो हवा ही निकाल दी
मिलती नहीं है क्रीम मुझे मेरे ब्रांड की
झुंझलाके उसने कल पे मुलाकात टाल दी
कमजोर दिल के लोग भी हैं इश्क के मरीज
फिर क्यों खुदा ने हुस्न को ये मस्त चाल दी
ये कहके सब उतार दो कर्जा विदेश का
मंत्री पे एक बच्चे ने गुल्लक उछाल दी
पीकर कई मरे पढ़ी नीरव ने जब खबर
अपनी बची शराब मुझे उसने ढाल दी।
पं. सुरेश नीरव
मो.९८१०२४३९६६

1 comment:

रजनीश के झा said...

पंडित जी प्रणाम,
आपकी हास्य गाथा को हमारा सलाम. मजा आ गया.