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29.5.08

कितना सुंदर था वो बचपन ,कैसा है ये आज का बचपन


भोला बचपन , प्यारा बचपन ,कितना सुंदर था वो बचपन,सुबह देर से उठाना , जल्दी सोना , बिन चिंता सपनो मै खोना, कभी रोना तो कभी हँसना , सबसे अपनी बातें मनवा लेना , कितना न्यारा था वो बचपन , प्यारी सी किताबे रंग बिरंगी , सुंदर कविताएं चाँद तारो की , थोड़ा सा काम ,पूरे दिन आराम , खेल खेलना दोस्तो संग , सूरज की शादी चाँद के संग, गुड्डे - गुडियों से खेला करते थे बचपन मै झूला करते थे ,न चिंता किसी की न फिक्र कोई , पंख बिना ही उड़ जाते थे, सारी खुशियाँ झोली मै भर लेते थे , कभी भागते तितलियों के पीछे तो कभी नीले आकाश को छुवा करते थे, मम्मी - पापा के प्यारे थे हम , सबके राज दुलारे थे .
आज का बचपन---------------------
भोला बचपन,प्यारा बचपन, पर जाने क्यों आज , नीरस हो गया बचपन , सुबह जल्दी उठना , रात देर से सोना, चिंता मै सपनो का खोना , हंसने का भी टाइम नही अब , रोने को भी टाइम नही है, हर दम चिंता सताती , पढ़ाई की ही रट लगी रहती , निकलना है सबसे आगे , मम्मी हरदम यही समझाती , खो गई चाँद - तारो की कहानी , हो गई अब ये बहुत पुरानी , अब कोई नही भागता तितलियों के पीछे , न देखता है नीला आकाश कोई , और न अब पंछियों सी ही आजादी है , खेल - खिलोने छुट गए सब , संगी- साथी भी रूठ गए अब , हरदम नंबर आने की होड़ लगी है , सबको पीछे कैसे छोड़ना है , यही जोड़ - तोड़ लगी है , अपना वजन है कम , किताबो का ज्यादा है , इस कोम्पटीसन के जमाने ने तो , बच्चो से बचपन ही छीन लिया है .

3 comments:

हरे प्रकाश उपाध्याय said...

bahut achchhi kvita hai kamla jee

rajendra said...

kamalaji, bajarbad se paida hui nayi tarah ki andhi daud ne n kaval bachcho ka bachpan chhin liya hai, usne sabka kuchh n kuchh chhin liya hai. umda kavita ke liye sadhubad

रजनीश के झा said...

vaah vaah kamlaa jee achha lika hai. badhai hai aapko