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22.5.08


विद्रोहिनी
मैं प्रतीक हूँ बदलती भारतीय नारी का जो विद्रोहिनी है अपनी राहें ख़ुद बनती है आजाद है अपनी सीमा ख़ुद निर्धारित करती है. It’s a space of changed Indian woman..
Tuesday, May 20, 2008

बलात्कार करेंगे
बहुत देखें हैं ऐसे जो हमे तन ढकने की धमकी देते हैं,न ढको तो बलात्कार करेंगेबहुत देखें हैं ऐसे जो हमे जो कमाने खाने के लिए घर से न निकलने की धमकी देतें है,निकलोगी तो बलात्कार करेंगेबहुत देखें हैं हमने ऐसे जो परम्परा का रोना रोते है, न मानोगी तो बलात्कार करेंगेबेटी बहन माँ या पत्नी बन के रहो न रहोगी तो बलात्कार करेंगेहमारी बराबरी न करो,हमारे साथ नही पीछे चलो न मानोगी तो बलात्कार करेंगेकितनी बार बलात्कार करोगे हम जिए हैं जीते रहेंगेडर ख़त्म हो गया है हमारा अब समर है हमारा नारा
Posted by मेरा कोई नाम नही मैं विचारधारा हूँ,एक क्रांति हूँ.. एक विद्रोह हूँ -विद्रोहिनी at 5:26 AM

3 comments:
शोभा said...
बहुत बढ़िया लिखा है। अगर ऐसा आत्मविश्वास आजाए तो कुछ भी बदला जा सकता है। बधाई
May 21, 2008 8:14 AM
अमिताभ फौजदार said...
डर ख़त्म हो गया है हमारा अब समर है हमारा नाराvery nice !! with best compliments amitabh
May 21, 2008 10:22 AM
Lovely kumari said...
chubhti sachayi.
May 21, 2008 10:37 AM
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मेरा कोई नाम नही मैं विचारधारा हूँ,एक क्रांति हूँ.. एक विद्रोह हूँ -विद्रोहिनी
About Me
ध्यान से देखो मैं तुम्हारे आस पास विचरती मिल जाउंगी.मैं समाज मे सर्वत्र हूँ, फिर भी मैं असामाजिक हूँ.मैंने अपनी परिभाषा ख़ुद बनाई है.मैं अपने चरित्र निर्धारण के लिए वेदों-पुराणों या घिसी-पिटी सामाजिक मान्यताओं का मुह नही जोहती. हाँ मैं विद्रोहिनी हूँ, मैं क्रांतिकरिणी हूँ


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विद्रोहिनी

4 comments:

डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) said...

बन कर आंधी तूफ़ानी लड़ती जा जुल्म से मर्दानी
तू शक्ति है तू ज्वाला है तू दुर्गा और तू ही भवानी..
माता जी आपके चरणों में प्रणाम स्वीकार करें,वन्दे मातरम....
जय जय भड़ास

ab inconvenienti said...

माहौल देखकर तो ऐसा ही लगता है अब अपने हिंदुस्तान में भी 'ब्रा-बर्निंग' आन्दोलन जैसा कुछ छिड़ने वाला है

रजनीश के झा said...

विद्रोहिनी को मेरा नमन.

आप के आगे नत मस्तक हूँ.
आपकी आत्म-विश्वास से लबरेज ये आपके तेवर क्रांति लाये.

जय जय भडास

VARUN ROY said...

औरतों के केम्प से मर्दानी हुंकार सुन कर अच्छा लगा. इस हुंकार की गूँज बलात्कारियों में दह्सत बनकर गूंजे तो और भी अच्छा लगेगा.
वरुण राय