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24.5.08

बन्दर के हाथ से उस्तरा छिना, तो गंजा हो गया

उत्तरी भारत के सबसे ज्यादा अन्न उत्पन करने वाले राज्य के संपन्न शहर में कही से एक बन्दर आ गया ! बन्दर एक खूबसूरत पेड़ की टहनी पर जा बैठा! इस पेड़ के ज़्यादा पत्ते तो नही थे पर यहाँ आने वाले को बहुत सकूं मिलता था! बन्दर के हाथ में कही से लकड़ी आ गई! और वह ख़ुद को बन्दर से आदमी समझने लगा! शरारती बन्दर सिर्फ़ ख़ुद को आदमी समझता और यहाँ आने वालो को तुच्छ कह कर डराने लगा! कुछ लोग डरे तो वह ख़ुद को राजा समझने लगा! पेड़ ने देखा के यह बन्दर घमंडी हो गया है और लोगों का नुकसान कर सकता है! तेज़ हवा चली तो पेड़ ने मौका देख कर टहनी ज़ोर से हिलाई, तो यह बन्दर कूद कर साथके पेड़ पर जा चढा!
नया पेड़ खूब हरा भरा था! घमंडी बन्दर यहाँ बैठ कर यह कहता के शहर की खोज तो उसने की है! यही उसकी mulakaat कुछ चाटू किस्म के कुत्तो के साथ हुई! बन्दर कुत्तो को खूब झूटी कहानिया सुनाता और कुत्ते उसकी बात पर तालिया बजाते! बन्दर चार कुत्तो को अपने साथ देख कर ख़ुद को सबसे बड़ा बादशाह समझने लगा!
बन्दर के हाथ में कहीं से उस्तरा आ गया बस इसके बाद बन्दर ने पेड़ के नीचे आने वाले सभी को छीलना शुरू कर दिया! बन्दर का घमंड इतना बढ़ा के उसने पेड़ पर घोसला बना कर बेठे बाकि पक्षियों पर भी उस्तरा चलाना शुरू कर दिया और उनके पंख नोचने की कोशिश करने लगा! पक्षियों की आवाज़ पेड़ तक पोहंची लेकिन शातिर बन्दर भोले पेड़ को झूठ बोलता रहा! आखिरकार पक्षी उड़ कर दूसरे पेड़ पर चले गए! घमंडी बन्दर ख़ुद को सबसे बड़ा मान ने लगा और उसने पेड़ पर ही उस्तरा चलाना शुरू कर दिया! पेड़ ने इस बार उसे भगाया नही नीचे ज़मीं पर पटक दिया! बन्दर इस काबिल भी नही रहा के किसी और पेड़ पर चला जाए! उसने अपनी हाँ में हाँ मिलने वाले कुत्तो को बुलाया लेकिन ज़मीं पर पोहंचे बन्दर को कुत्तो ने भी काटना शुरू कर दिया!
शिक्षा : पाप का घडा जरूर फूटता है !

3 comments:

डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) said...

आज के समय में ये कहानियां जो हम बचपन में पढ़ कर भूल गये हैं कितनी प्रासंगिक जान पड़ती हैं, एक बार फिर गुरू जी की तरह कथा सुनाने के लिये आपका आभार;उम्मीद है कि अब भूलूंगा नहीं..

रजनीश के झा said...

बचपन याद दिलाने के लिए धन्यवाद

अनिल भारद्वाज, लुधियाना said...

Yeh Bandar Kise Vishesh Jati Ka to nahi hai. Par yeh tho nishit hai ki bandar tha tho samjadhar maath kese kha Gaya samaz nahi aata. Hindu Shastro mein kha gaya hai ki Thakur Ji Bhi galti Karyate hai tho bhogna padega. Jai shri Ram.