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29.5.08

तुम मुझे बलात्कार के प्रयास का आरोपी साबित करो वरना मैं तुम्हें कालिया-कमीना-फादरचोद कहूंगा

दिल्ली का कालिया दैत्य अपने बुने जाल में धंसता चला जा रहा है। यकीं न हो तो नीचे के दोनों प्वाइंट्स पर नजर डालिए....

नंबर एक
एनडीटीवी के बैनर का दुरुपयोग करने का सिलसिला अविनाश अब भी जारी रखे हुए है। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं और एनडीटीवी प्रबंधन से इसे स्वतः संज्ञान में लेने का अनुरोध करते हैं। इसकी पुष्टि इस बात से होती है कि ....

कालिया ने जो मेल दिल्ली पुलिस के लिए तैयार की है और हम लोगों को डराने के लए भेजी है, उसमें मुद्दा तो ब्लागिंग से जुडे़ झगड़े का है लेकिन उसने अप्लीकेशन में अपना काम और पद एनडीटीवी का दिखाया है, मोहल्ला और माडरेटर का नहीं दिखाया है। ये दोगलापन है। वैसे तो आप दिन भर मोहल्ला मोहल्ला और माडरेटर माडरेटर और ब्लाग ब्लाग चिल्लाएंगे, जब खुद पर पड़ेगी तो पुलिस के पास एनडीटीवी का बैनर लेकर जाएंगे। यह बताता है कि कालिया अंदर के कितना दोहरा, खोखला और धूर्त टाइप प्राणी है।

जहां जिस तरह काम बने, बना लो के फंडे पर जीने और सोचने वाला यह बंदा एक और बड़े फंदे में फंस गया है।

अतीत में भी अविनाश ने एनडीटीवी के बैनर के सहारे पत्रकारों को नौकरी देने का झांसा देते हुए उन्हें अपने ब्लाग पर लिखने के लिए बाध्य करता रहा है। यह सरासर किसी संस्थान की प्रतिष्टा का दुरुपयोग है। हम इस कृत्य की घोर निंद करते हैं और एनडीटीवी प्रबंधन से ऐसे भेड़िए टाइप आदमी के बारे में छानबीन करने की गुजारिश करते हैं।

((अपने भड़ासी साथियों और शुभचिंतकों से अनुरोध है कि वो एनडीटीवी के कर्ताधर्ता प्रणय राय या अन्य किसी शीर्षस्थ अधिकारी की मेल आईडी मुझ तक मेल से पहुंचाएं। मेरी मेल आईडी है yashwantdelhi@gmail.com))


नंबर दो
वो बार बार मुझे बलात्कार के प्रयास का आरोपी बता रहा है। मैं इस मामले में लगातार चुप हूं क्योंकि मैं इसमें कुछ भी बोल के अपने लोगों को तमाशा नहीं बनाना चाहता, अपने लोगों पर कीचड़ नहीं उछालना चाहता। जितनी भी बदनामी होनी है, वो सिर्फ मेरी हो ले। ये मेरा बड़प्पन या त्याग नहीं, ये मेरी सहज वृत्ति है जिसे हमेशा से जीता आया हूं और आगे भी बरकरार रखूंगा।

तो मैं कह रहा था कि हाहाकार मचाकर बंदर कूद गया लंकर के अंदर वाली स्टाइल में कालिया जिस तरह लगातार इस मुद्दे को गलत-सलत तरीके से उछालकर और शब्दों के मैथुन से भांति भांति के एंगिल पैदाकर मुझे बदनाम करने की कोशिश कर रहा है, उसमें वो अब खुद ही फंसने वाला है।

मेरा चैलेंज है कि वो मुझे बलात्कार के प्रयास का आरोपी ठहराए वरना मैं उसका नाम सदा के लिए कालिया कमीना फादरचोद रख दूंगा। वो बताए कि उसने किस आधार पर मुझे बलात्कार के प्रयास का आरोपी कहा है। मेरी चुप्पी का मतलब मेरी कमजोरी नहीं, मेरी मजबूरी नहीं, मेरा मनुष्यता में यकीन है जिसके नतीजे में हमेशा मेरे हिस्से दुख, बुराई और दर्द ही आते रहे हैं और इन्हीं से सींचा गया हूं मैं और इसी सिंचाई से अंदर की मजबूती आती है।


डा. रूपेश, यशवंत, रजनीश के झा, हृदयेंद्र प्रताप सिंह, मनीष राज से तुम्हारा कोई निजी झगड़ा नहीं है, ये वैचारिक झगड़ा है और ये केवल पांच से नहीं बल्कि भड़ास के 315 सदस्यों और लाखों पाठकों से है।


तुम्हारी कमीनगी अतीत में कइयों के द्वारा खोली जा चुकी है, लोगों का तुम पे भरोसा नहीं है क्योंकि तुम्हारा हर कदम अपने स्वार्थ को केंद्र में रखकर होता है। अगर तुमने जीवन में इमानदार लड़ाइयां लड़ी होतीं तो हम सारे भड़ासी खुद ब खुद तुम्हें अपना नेता मान लेते लेकिन तुम्हें क्या पता कि इमानदारी किसे कहते हैं, सहजता किसे कहते हैं, सरलता किसे कहते हैं। तुम अभी जीना सीख ले बेटा।

अभी तो तुम एनडीटीवी के बैनर के चलते उछल रहा है, सोच वो दिन जब तुम्हारे उपर कोई बैनर वैनर न होगा, सिर्फ बर्र के छत्ते होंगे और उस छत्ते पर ढेला हम लोग मारेंगे।


तुम्हारे पास 24 घंटे का वक्त है अविनाश। या तो तुम अपनी सभी पोस्टों से बलात्कार के प्रयास के आरोपी शब्द को हटाओ या फिर तुम कालिया कमीना फादरचोद कहे जाने के लिए व अन्य दुष्परिणाम झेलने के लिए तैयार रहो।

मुझे कानून की धाराओं का नहीं पता। न कभी पता करने की जरूरत पड़ी। पर मुझे इतना पता है कि कालिया मुझे उखाड़ने के लिए किसी भी हद तक गिर सकता है और कोई भी लैंग्वेज इस्तेमाल कर सकता है।



नंबर तीन
अविनाश, पुलिस के नाम का इस्तेमाल करके डराना भी एक अपराध है। तुम्हें शायद नहीं पता। हमारे पास सारे सबूत इकट्ठे हो रहे हैं। तुमने गीदड़भभकियों के जरिए सामने वाले को डराने का खेल रांची, पटना और देवघर में खेला होगा जिससे लोग डरे भी होंगे। या तो फिर तुमने दिल्ली में सरल सहज व संवेदनशील बुद्धिजीवियों से पंगा लिया होगा जो तुम जैसे थेथर, नंगे और कुंठित पंगेबाज से भिड़ने में डरते होंगे। इस बार ही तुम असल लोगों से भिड़े हो। तुम्हें अगर फाटा पायजामा साबित करते हुए सड़क पर न टहलवा दिया तो हम लोगों का नाम भी हरामी द ग्रेट नहीं।


जय भड़ास
यशवंत

(....भाई भड़ासियों से माफी के साथ कि मैंने इस मुद्दे पर न लिखने का वादा किया था पर मजबूरन व आत्मरक्षार्थ मुझे ये जंग लड़नी पड़ रही है। उम्मीद है अन्यथा न लेंगे और अपना प्यार बनाये रखेंगे)

1 comment:

रजनीश के झा said...

दादा,
कानून और पुलिस की बात जिस तरीके से इस ने हम पर लगाने की कोशिश की है उस से इसके पत्रकार न होने पर अब संदेह नहीं विश्वास हो गया है की ये देवान जी खानदानी कार्य में माहिर हैं और ये कोई भी मैथिल बता देगा की देवान जी का खानदानी कार्य क्या रहा है. इसने जिस तरह से वतव्य दिए हैं उस से इसके साख का तो रहने दो इसने एन डी टी वी की साख तक पर बट्टा लगा दिया है जहाँ बड़े गर्व से काबिल लोगों को रखने की बात की जाती रही है. राम जाने इस कालिए पर इस मीडिया हॉउस में किसका हाथ है नहीं तो ये यहाँ चपरासिगिरी करने लायक भी नहीं है. रही बात आपका तो अब सर से पानी गुजार गया अगली कार्रवाई तुरन फुरत में भडासी शैली में शुरू कर देतें है.
जय जय भडास