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28.6.08

उसके चेहरे पर आयी मुस्कराहट ने मुझे खुश कर दिया

मुझे लगा की मैं अकेला दुखी हूँ। इसलिए जो मन में आया लिखा पर अब खुश इसलिए हूँ क्यूंकि भड़ास के मध्यम से जिस तरह से लोगों ने करुनाकर को जो हिम्मत दी है उसे शायद ही कोई दे पता डॉक्टर रूपेश ने उससे बात करके उसका सारा दुःख ही दूर कर दिया। मुझसे हर कोई पूछ रहा है की अमित जी आप अकेले नही हैं हम आप की मदद करना चाहते हैं। पर बता दूँ आपका सहयोग और प्यार के जो बोल थे उन्होंने ही मुझे इतना आनंदित कर दिया है की किसी और मदद को मँगाने का दिल भी नही कर रहा है। मैं चाहता हूँ करुनाकर अपने पापा से मिल जाए और मेरी कोई इच्छा नही है। एक बार करुनाकर ने मुझे फ़ोन करके कहा था भैया देखना मैं कितना बड़ा आदमी बन जावूंगा। आपको ज़हाज़ का सफर करवाऊंगा। घुमाने ले चलूँगा। मुझे उसकी वो बात अभी भी नही भूली है। अब जब वो यहाँ तक पहुच गया है तो मैंने भी सोचा क्यूँ ना करुनाकर को ज़हाज़ का सफर करवा दिया जाए। हो सकता है की दो तीन दिन में मैं उसे लखनऊ भेजूं तो वो ज़हाज़ से ही जायेगा। आज यशवंत जी ने मुझे बोला की उसे मैं उनसे बात करके फिर लखनऊ का प्रोग्राम तैयार करूँ तो मुझे बस उनका इंतज़ार है। ओमप्रकाश तिवारी जी, महावीर सेठ जी विशाल शुक्ला जी, भाई शशि कान्त अवस्थी जी और रूपेश जी मुझे आप से सिर्फा एक मदद चाहिए अगर आप किसी को जानते हों तो किसी तरह से करुनाकर के पापा को रिहा करवाने का प्रयास करवा दीजिए। क्योंकि वो अपराधी नही हैं। मुझे लगता है करुनाकर उन्हें बहार देखकर अपनी उम्र में कुछ और दिन जोड़ लेगा। वैसे अब सारी जिम्मेदारी यशवंत भाई ने उठा ली है तो मुझे और कुछ नही कहना है। पर इस तरह से जो आप लोगों का सहयोग मिला उसका एहसान मैं कभी नही चुका सकता। मुझे पता है आप लोगों की मदद से करुनाकर को इतना खुश कर दूंगा की वो अपने अल्पकाल में ही कई सौ जिंदगियां जी लेगा।
धनयबाद
अमित द्विवेदी

3 comments:

Som said...

Amit Ji,

Am first time at your blog, meanwhile, got too much impress with your writing, presentation and above all concept of this blog.

It's really wonderful.

डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) said...

अमित भाई,फिल्म नहीं चल रही है जिन्दगी है तो आभार का भार मत डालिये;अगर आप ऐसा मानते हैं कि अल्पकाल में ही खुशियां वगैरह जुटा कर उसे फ़ुरसत करना है तो फिर इलाज वाला इरादा बदल कर खुशियां-खुशियां खेलते हैं जिसके लिये हम सब लोगों को एक लड़की जुटानी होगी जो फुदक-फुदक कर नाच सके और करुणाकर से कहे कि "सीख ले...इक पल में जीना यार सीख ले....."। लगता है कि आप मान ठान बैठे हैं कि बस "अल्पकाल"ही बचा है,प्रभु जी ये तो बताओ किसके पास कितना काल है ये आपको कैसे पता? या फिर एम्स के सुअरों ने आपका ब्रेनवाश करके दिमाग में यह बात ठूंस दी है।क्या ब्रांकोस्कोपी कराया था?क्या इन्फ़ाइजीमा या कन्सोलिडेशन के बारे में कोई लक्षण है रिपोर्ट में?वजन में कितनी कमी आ गयी है?रक्त के कौन से टैस्ट कराये गये हैं?मैं तो चाहता हूं कि लम्बी जिन्दगी जिया जाए चाहे वो धरती पर बोझ बन कर ही क्यों न हो :)

महाबीर सेठ said...

amit ji
main khud Gonda ka hun
aap batayen Gonda me aour Gorakhpur me kya karna hai.
wahan mere dost achche reporter hain
mere mobile par phone kar sakte hain
- 09417550945
- 09876050945