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23.6.08

खुद चूने का पान हुए संयोजकजी


हास्य-ग़ज़ल
कवियों में मलखान हुए संयोजकजी
रसिकों के रसखान हुए संयोजकजी
इतनी तंबाकू-कत्थे से की यारी
खुद चूने का पान हुए संयोजकजी
चुनचुनकर सब फ्लाप कवि, एक टीम रची
खुद उसके कप्तान हुए संयोजकजी
मंचखोर तुक्कड़ कवियों के टापू में
मनचाहे वरदान हुए संयोजकजी
भरते सुबहो-शाम जिन्हें मिलकर चमचे
ऐसे कच्चे कान हुए संयोजकजी
मरियल कवि को मिला लिफाफा मोटा-सा
मंद-मंद मुस्कान हुए संयोजकजी
पाल-पोसकर बड़े किये चेले-चांटे
गुरगों के भगवान हुए संयोजकजी
पशुमेला क्या लालकिला तक चर डाला
भैया बड़े महान हुए संयोजकजी
फसल बचाएं मठाधीश की चिड़ियों से
देखो स्वयं मचान हुए संयोजकजी
नीरव से मुठभेड़ हुई जब करगिल में
पिटकर पाकिस्तान हुए संयोजकजी।
पं. सुरेश नीरव
मो.९८१०२४३९६६





3 comments:

डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) said...

पंडित जी,पुनः काव्य व्यायाम पर वापिस आ गए,स्वागत है हमारे साहित्य जिम्नेशियम में...
जय जय भड़ास

यशवंत सिंह yashwant singh said...

जय जय
काव्य गोष्टी वाली वीडियो लाए हैं या नहीं, हमहूं देखना सुनना चाहते हैं.....

suresh neerav said...

बंधुवर यशवंतजी...
कविसम्मेलन के फोटोग्राफ्स और वीडियो क्लिपिंग आप से मुलाकात करके समारोह पूर्वक आप को भेंट की जाएंगी। निश्चिंत रहें। आपकी टिप्पणी पढकर मज़ा आ गया ।
जय भड़ास.. जय यशवंत।
पं. सुरेश नीरव