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19.8.08

पब्लिक का क्या होगा भाई

गुरूजी अपने चेले कोडा से नाराज़ होकर समर्थन ले चुके हैं । झारखण्ड सरकार अल्पमत में है। सरकार रहेगी या जायेगी यह तय नही है , लेकिन आठ सालो में राज्य की जनता के नाम पर यहाँ के नेता क्या गुल खिला रहे हैं किसी से नहीं छुपा । जनता न तो मधु कोडा को मुख्यमंत्री बनाना चाहती थी और न ही शिबू सोरेन को ही उसने चुना है । फिर भी ये नेता किस मुँह से अपने हरेक फैसले को जनता का फैसला कहते हैं । आठ सालो पहले जब बिहार से अलग झारखण्ड बना तो लोगो को लगा बिकास की गंगा बहेगी । पर बिकास पब्लिक का नहीं नेताओ और मंत्रिओं का ही हुआ । यही नहीं आदिवासी तो और भी गरीब हुए हैं । जिनके नाम पर सारी राजनीती होती है ।

1 comment:

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) said...

अखिलेश भाई,
पब्लिक का क्या होना है, वैसे भी बिहार विभाजन के बाद से ही जिस प्रकार से राजनेता और राजनैतिक पार्टियों का सोने का खान बना झारखण्ड लुट का केन्द्र बना हुआ है, पब्लिक बेचारी लुट रही है. विकास के सब्जबाग ने झारखण्ड को भ्रष्टाचार का अखाडा बना दिया है जिस में कूद कर सभी अपने दाव आजमाना चाहते हैं. क्या भाजपा क्या कांग्रेस क्या झामुमो और क्या कम्युनिष्ट. सभी के लिए ये कोयलांचल सोने का अंडा देने वाली मुर्गी है और मुर्गी को किसने देखी है बस अंडे की लूट मची है.
जय जय भड़ास