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28.11.08

प्रिये साथियो


प्रिये साथियो.......
देश मे फिर आंतकवाद ने कितने घरो के चिराग भुजा दिए यह आप हम नहीं जानते ऐसा कर उन को क्या मिला पर दोस्तों ,साथियो उन माँ से पूछो जो अपने बच्चो को खोने का दर्द सहती है उन बहनों से पूछो जो सारी उम्र टक टकी लगाए इंतजार करती रहती है ...माँ बहने जीवन संगनी ,बच्चे ,कितने रिश्ते खत्म हो जाते है कितना अकेला पन से होता इनके जाने के बाद ...कोई उनको समझाए ...की उनके भी रिश्ते ऐसा ही उनके जाने के बाद दर्द पैदा करते है वो भी रिश्तो की डोर से बंधे होंगे ..क्यूँ ...मानवता का चहेरा भयानक होता है उसका दूसरा रूप क्यूँ नहीं बना रहता ...हम शर्मिंदा है आज ...उन रिश्तो के आगे जो इस पीडा के शिकार बने ..उन व्यक्तितव के आगे जो शहीद हुवे ..आज हम सब भाई ,दोस्त ,साथी ,उन सब के लिए भगवान् से प्राथना करे की उनको अपने चरणों मे स्थान दे शान्ति दे व् उनके परिवार ,रिश्तो को हिम्मत दे !हम सब का फ़र्ज़ बनता है की हम उनके आत्मा के लिए एक दिया जला उनको समर्पित करे व् दुआ करे जरुर यह मेरी आप सब दोस्तों साथियो से हाथ जोड़ प्राथना है ..एक दिया एक प्राथना ...जय साई राम

संजय सेन सागर
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