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15.11.08

मत बांटो मजहब के नाम पे

अगर हम सब में जरा भी ईमान होता ,
तो धर्म के नाम पे हिंदू न मुस्लमान होता ,
न कोई अपनों को खोता न इन्सान होने पर रोता ,
न किसी बचे के आँखों में खौफ का मंजर होता ,
न किसी माँ की गोद से कोई बच्चा खोता ,
मजहब के नाम पे देश को बाँटने वाले ,
अगर रमजान में राम दिवाली में अली को देखा होता ,
तो इन्शानो का खून बहाने से पहले जरूर रोता ,

पत्रकार मित्र धीरेन्द्र पाण्डेय की प्रस्तुति ...............

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