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30.4.09

जो झूठा मक्कार ,फरेबी नेता वही महान यहाँ | Loksangharsha


हमारे देश की आबादी एक अरब से ऊपर है जिसमे 85 करोड लोगो का खर्च 6 रुपये से लेकर 20 रूपए प्रतिदिन हैइसी में 26 प्रतिशत यानि लगभग 28 या 30 करोड लोगो को दो जून की रोटी नसीब नही हैकरोडों लोग प्रतिवर्ष बिना अनाज के दम तोड़ देते है और करोडों बच्चे कुपोषण का शिकार है90 प्रतिशत लोग अपने बच्चो का दाखिला डाक्टरी इंजीनियरिंग में नही करा पातेमैनेजमेंट संस्थानों द्वारा अवैध तरीके से फीस बढायी गई हैइनमे अपने बच्चे पढाने वाले कितने लोग हैसस्ती शिक्षा इस चुनाव का मुद्दा नही है
खेती - बाडी के हालत ख़राब है। राजग सरकार से संप्रंग सरकार तक 8 रूपए प्रति लीटर बिकने वाला ङीज़ल ३६ रूपए तक बिका । अब चार या पाँच रूपए कम हुआ है, जबकि अंतर्राष्टीय कीमत के हिसाब से यह 18 रूपए प्रति लीटर होना चाहिए । खाद की कीमतों में अबाध वृद्धि हुई परन्तु अनाज की कीमते अब बहुत कम है। उस घाटे की खेती के फलस्वरूप किसानो ने पूरे देश में आत्महत्याएं की वामपंथियों के दबाव के चलते कुछ कर्जा माफ़ किया गया परन्तु किसानो के हालत में कोई सुधर नही हुआ । यह भी सवाल चुनाव सेगायब है।
आज उत्तर प्रदेश के बनाराश इलाके में लाखो कारीगर बेरोजगार हो गए है क्योंकि बनारस के साड़ी बनने वाले दस्तकारों के पास काम नही है। बनारसी साड़ी उद्योग संकट में है । सूखे के कारण जो पैकेज बुंदेलखंड इलाके को दिया गया था वह बंदरबांट का शिकार हो गया और बड़े विज्ञापन अखबारों में देकर बेशर्मी से फोटो खिंचवाकर जनता को गुमराह किया जा रहा है । राष्ट्रीय स्तर पर के हालात सुधारने के लिए सस्ती , सिंचाई ,खाद,बीज की कोई कारगर नीति बनाने की आवशकता है ,परन्तु यह मुद्दा भी चुनाव का मुद्दा नही।
आज सपा , बसपा ,कांग्रेस या भाजपा की सरकारें और इनके पुलिस प्रशासनिक अफसर ,माफिया,नेताओं, नेताओ के गठजोड़ ने आम नागरिक का जीना दूभर कर रखा हैभ्रष्टाचार का बोलबाला
है ,और आम आदमी को नाच नचा रहे है मालूम कितने लोगो की जमीन इस गठजोड़ की भेट चढ़ चुकी है । सड़के मानक के हिसाब से नही बनती है। न नहरों की सफाई होती है,जनता की गाढी कमी की टैक्स की रकम यह गठजोड़ खाए जा रहा है। परन्तु सब जानते हुए भी यह लोग अखबारों में झूंठा प्रचार करके जनता को गुमराह कर रहे है।
डॉक्टर राम गोपाल वर्मा
क्रमश :
लोकसंघर्ष पत्रिका के चुनाव विशेषांक में प्रकाशित

2 comments:

alka sarwat said...

जब तक भोगी भूप प्रजाओं के नेता कहलायेंगे
ज्ञान,त्याग ,टाप नहीं श्रेष्ठता का जब तक पद पायेंगे
तब तक पडी आग में धरती इसी तरह अकुलायेगी
चाहे जो भी करें ,दुखों से छूट नहीं वह पायेगी

Rakesh Kumar Pal said...

Aapka ye article padh kar main bahut dukhi hua, aur bahut khush bhi hua main bhi un garibon me se ek hoon,abhi meri umra matra 21 yr hi hai, lekin is umra me mere upar bahut badi jimmedaari hai, ghar me 12 member hain,un sabka kharch chalana aur bhai bahno ko padhana muskil hai kyunki hamare pita ji exp h chuke hain,is mahol me gareebi ka saamna karna mushkil hai lekin jhel raha hoon,bhrashtachar ne hi garib logo ka jeena doobhar kar diya hai, main ek college me computer lab incharge hoon , aur 13 ghante roj kaam karta hoon per mujhe 5000 pm hi milte hain aur main staff me logon se hilmilkar nahi rehta shayad isiliye meri payment nahi badha rahe hain,main staff me isliye milkar nahi rehta ki unme log aapas me chungli aur ek dusre ki buraayi batlaate rehte hain, lekin main gappe marne me kabhi nahi rehta, main sirf apne kaam se matlab rakhta hoon bus, aur hamare saath hi peon logon ne join kiya lekin unki payment 7500 pm hai, ab aap sochiye ki aisha kyun ? kyunki woh peon bhi is bhrashtachaar me shamil rehta hai, agar main bhi shamil ho jau to shayad meri bhi payment badh jaaye. lekin main imaandaari ki kamayi per jada vishwas karta hoon, aapki baat padhkar main bahut khush hua, lekin bharat me bhrashtachaar khatam hone wala nahi hai, kyunki india me log apni bhalaayi ke alawa kisi ki bhalayi nahi sochte,
bharat me bahut hi kam log hain jo gareebon ke baare me sochte hain.

dhanyavaad,
Raksh kumar pal
kumarrakeshpal@gmail.com