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10.7.09

जब मैं २१ साल का था....

दिसम्बर २००५: जब मैं २१ साल का था तब में अपनी जिंदगी को - साल के तीन भागों में बाँट कर तीन कवितायेँ लिखी थी. मैं सोंचा करता था आखिर मैंने क्या किया है आज तक... मैंने क्या सीखा है आज तक... मेरी आदत थी मैं रोज रात लगभग आधे घंटे छत पर अकेले बैठा करता था और खुद के बारे में सोंचा करता था (बात अलग है मैं आज समय अभाव के कारण ऐसा नहीं कर पता हूँ)... बचपन से मुझे सभी सीखाते रहे कि मुझे कुछ बनना है, कुछ ख़ास करना है और जब मैं इस राह पर बढ़ने लगा, जब मैंने कला (poetry and paintings) के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहा तो उन्ही लोगों ने मुझे सिर्फ नौकरी करने की सलाह दी. उन्होंने तब चाहा कि मैं सिर्फ एक अच्छी नौकरी करूँ, क्योंकि उनकी नजर में मेरी कला सिर्फ समय बर्बाद करने का जरिया थी... बस उन्ही लोगों के लिए मैंने painting हमेशा के लिए छोड़ दी पर कविता नहीं छोड़ पाया... और हर पल यही सोंचता रहता कि क्या मकसद है मेरे जीवन का... बस उस दिन मन में जो भी विचार आते गए, जो भी अपनी जिंदगी के बारे में समझ पाया लिख डाला... बस आज आप लोगों के साथ अपने भावो को बांटना चाहता हूँ... कवितायेँ पढने के यहाँ CLICK करें...

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