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30.7.09

एक मासूमियत मर गई

'मैं आज भी अपना बिस्तर किसी के साथ भी बाँटने को तैयार हूँ, और इसमें बुराई क्या है, हम भी इसी तरह बड़े हुए थे, मैं कोई ख़ूनी नहीं हूँ, न ही मैं कोई हत्यारा हूँ, माफ़ कीजियेगा माइकल जैकसन इनमें से कुछ भी नहीं है ", ये अल्फाज़ हैं इस युग के महानायक और महागायक माइकल जैकसन के,
"बिस्तर बाँटना", "साथ में सोना" ऐसे शब्द दुनिया के इस भाग में एक ही मतलब रखते हैं "शारीरिक सम्बन्ध", इस प्यारे "पीटर पैन" की ऐसी बातें पश्चिमी में कौन समझता, जहाँ बच्चे के जन्म से पहले ही यह तै कर लिया जाता है कि बच्चे के सोने का कमरा कौन सा होगा, नवजात शिशु सुन्दर सजे-धजे कमरे में हर प्रकार के तंत्र-मन्त्र के साथ बस जाता है, बस, बस नहीं पाता है तो अपनी माँ की गोद में, माँ की लोरी, माँ के स्पर्श से महरूम बचपन रात के सन्नाटे में अँधेरे से लड़ता-भिड़ता अकेले कमरे में पड़ा होता, बस एक वाकी-टाकी के सहारे, जिसमें वह चीख़-चीख़ कर अपने अकेलेपन की गुहार तो लगा देता है , माँ आती भी है लेकिन, थपका कर और दरवाजा भिड़ा, अकेली छोड़ कर फिर चली जाती है, यहाँ बच्चे पालने का यही सलीका है, हर बच्चा अपना बचपन सामने खड़ी अलमारी में भूत देख-देख कर बिता देता है, माँ-बाप बच्चे को अपने साथ नहीं सुलाते क्योंकि यह "बहुत बुरी" बात है, यह "गलत" है, इससे बच्चों पर बुरा असर पड़ता है, पश्चिमी संस्कृति का ऐसा ही मानना हैं, इस सलीके को अपने जीवन में अपनाते-अपनाते, बच्चे और माँ-बाप के कमरे की बीच की दीवार उठ कर जीवन में भी आ जाती है, और यह दीवार ता-उम्र नहीं गिरती, यहाँ के लोगों की मानसिकता यह समझ पाने में बिलकुल अक्षम है कि माँ-बाप और दूधपीता बच्चा एक ही कमरे में कैसे सो सकते हैं ?
शायद हम भारतीय ऐसी बातों से खुद को जोड़ नहीं पायें, क्योंकि हमारी माँ ने तो हमें अपने सीने से तब-तक चिपकाए रखा जब-तक उसका दूध सूख नहीं गया, अपनी गोद से तब-तक अलग नहीं किया जब तक हम उसकी गोद में अँटते रहे,
माइकल जैकसन भी इसी प्यार-दुलार की बात करते थे जिसे पश्चिम में समझ पाना असंभव था, वो अपने बचपन कि बातें करते थे कि कैसे आठों भाई-बहन ने एक ही कमरे में अपना बचपन गुजारा था, मैं उनकी इन सारी बातों से खुद को बड़ी खूबसूरती से जोड़ लेती हूँ क्योंकि हमने भी तो कुछ वैसा ही बचपन गुजारा है, बिलकुल बचपन सा मासूम सा, लेकिन इस बड़ी सी दुनिया में एक बचपन ने दम तोड़ दिया और एक मासूमियत मर गयी

1 comment:

Dhiraj Shah said...

सच मे आज एक मासुमियत मर गयी है ।