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27.10.09

कोई बात नहीं चुभती है अब तो मन में --डा श्याम गुप्ता की ग़ज़ल ---

ग़ज़ल

कोई बात नहीं चुभती है अब तो मन में |
कितना अनमन है, आलस्य भरा है मन में |

अनाचार अतिचार अनय,है चहुँ दिशि फैला ,
क्यों यह विष की बेल फूलती सकल भुवन में |

भ्रमर गीत अब नहीं, न पंछी कलरव करते ,
मुरझाये हर कली,पुष्प ,तरु आज चमन में |

हिंषा-द्वेष ओ द्वद्व -बैर सब और समाया,
नहीं आस्था रही किसी की आज अमन में |

गला काटने वालो ,हाथ मिलाओ,गले लगो तो,
कितना सुख-आनंद भरा इस प्रीति-छुअन में |

धुंध,धुंआ, विध्वंस मिटे ,जग से जीवन से,
प्रेम-प्रीति की सुरभि , बहे उन्मुक्त गगन में ||

4 comments:

आमीन said...

bahut hi achha likh hai.. great

Nirmla Kapila said...

धुंध,धुंआ, विध्वंस मिटे ,जग से जीवन से,
प्रेम-प्रीति की सुरभि , बहे उन्मुक्त गगन में ||
बहुत सुन्दर गज़ल है बधाई

AlbelaKhatri.com said...

बहुत ही बेहतरीन

उम्दा ग़ज़ल

गला काटने वालो ,हाथ मिलाओ,गले लगो तो,
कितना सुख-आनंद भरा इस प्रीति-छुअन में |

वाह !
जय हो !

Dr. shyam gupta said...

jay ho, jay jay ho.