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26.10.09

भड़ास

अच्छे - अच्छे बोलते हैं !
दिल की गांठ खोलते हैं !!
तमतमाते शब्द जिनके !
वो बन भडासिये डोलते हैं !!
सबके सब सिकंदर यहाँ !
जीत अपनी-अपनी खोजते हैं !!

-मदन बालियान
हरिभूमि
रोहतक
हरियाणा

2 comments:

seema mailk said...

bahut accha likha madan badhiyena...

reporter ki dairy said...

Wah Kya Baat Hai. Dum hai.