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22.3.10

व्यवस्था परिवर्तन के बहाने राजनीति की राह में बाबा रामदेव

योग गुरु बाबा रामदेव का मानना है कि व्यवस्था परिवर्तन के लिए मौजूदा लचर व्यवस्था को राजनैतिक मौत देनी होगी। पूरे सिस्टम में आमूल-चूल बदलाव करना होगा। शायद इसीलिए बाबा रामदेव व्यवस्था परिवर्तन के नारे के साथ भारत स्वाभिमान समिति के बैनर तले लोकसभा और देश की विधान सभाओं की सभी सीटों पर प्रत्याशी खड़ा करने का मन बना रहे हैं। बाबा रामदेव देश के मौजूदा नेतृत्व पर करारा प्रहार करते हुए कहते हैं कि भारत का नेतृत्व जितना कमजोर है, उतना किसी दूसरे राष्ट्र का नहीं है। इसीलिए व्यवस्था में परिवर्तन का बीड़ा भारत स्वाभिमान समिति ने उठाया है। बाबा के अनुसार, देश की राजनीति थानों से चल रही है। गरीब का दम निकल रहा है और अमीरों की तिजोरियां भर रही हैं। संसद में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण का समर्थन भी आप कर रहे हैं।

मेरठ में भारत स्वाभिमान न्यास एवं पतंजलि योग समिति के कार्यक्रम में भाग ले रहे बाबा ने कहा कि जब देश की युवा पीढ़ी में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने का जज्बा है तो फिर सत्ता की कमान उनके हाथ में देने से गुरेज क्यों? सत्ता के शीर्ष पर ऐसे लोगों को बैठने का हक हो जो भ्रष्टाचार से छुटकारा दिला सकें, पर मुझे नहीं लगता कि आज किसी नेता में यह क्षमता रह गई है। बाबा रामदेव का कहना है कि देश दलाली और कमीशनखोरी की वजह से खोखला हो रहा है। रामदेव बोले, वह न राजनीति नहीं करेंगे और न किसी पद को हासिल करने की चाहत रखते हैं। बाबा के मुताबिक, वह पद के भूखे इसलिए नहीं है कि राजनीति के शीर्ष पर बैठे लोग खुद उनका चरण स्पर्श करते हैं। उनका मकसद देश की व्यवस्था सुधारना है।

3 comments:

ersymops said...

बाबा हम भी आपके साथ है, बस रस्ते में ही न छोड़ दीजियेगा.

शंकर फुलारा said...

बाबा राम देव जी के विषय में यह भी पढ़ें भ्रष्टों को कैसे रास आ सकता है ऐसा राष्ट्रवाद
tensionpoint.blogspot.com

ठाकुर पदम सिंह said...

कुछ लोगों को यह रास नहीं आ सकता ये भी सच है
किन्तु ये सोचिये
१-क्या आप वर्तमान स्थिति से संतुष्ट हैं
२-अगर हाँ तो क्या और बेहतर नहीं होना चाहिए ?
३-अगर नहीं, तो निकट भविष्य में किसी पार्टी के पास इस तरह की सोच या एजेंडा है ?
४-हम दूध के जले हुए हैं हर जगह साजिश दिखती है, किन्तु अगर बाबा रामदेव के राजनीती में आने से देश और जनता का भला होता है दो इसमें बुराई क्या है ...
५-कुछ लोगों को बुरा लगना लाजमी है, बिल में पानी भरता है तो चूहे घबरा कर भागते हैं तो भागने दीजिए. राष्ट्र हित में किसी भी सकारात्मक पहल का स्वागत करना चाहिए.