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26.4.10

गालियाँ उत्तर भारत की

गालियाँ उत्तर भारत की

प्रिय मित्र
पिछले कुछ समय से उतर भारतीय गालियों को समझने एवं एकत्र करने में लगा हूँ . आवश्यकता इस लिया आन पड़ी के मार्च माह में एक हरयाणवी भाषा पर आधारित नाटक का मंचन मुंबई में होनेवाला था. सर्व खाप के तालिबानी फैसलों पर कटाक्ष करता यह नाटक बिना गालियों के अधुरा सा था. मंचन के बाद मेरे एक मित्र ने मुझ से कहा के अगला नाटक उत्तर भारत की गालियों पर ही आधारित होना चाहिए. आखिर गालियाँ भी तो हमारे संस्कृति एवं साहित्य में एक अलग स्थान रखती हैं. सोचा आप के ब्लॉग से भी मदद मांग लूं. तो दोस्तों खुल कर दीजिये बिंदास दीजिये आप का हार्दिक आभारी रहूँगा. आदर्श के. भल्ला

2 comments:

ashish said...

bhai sahab galee jannae kae leyae uttar bharat kae kese bhe mo. no. call kar and uske ma bahan ke karo bindas galee suno

kuldeep WAKE UP said...

प्रिय बन्धु,
उत्तर भारत की गालियों के संकलन का विचार अवश्य सराहनीय है |
उत्तर भारत में गालियों का प्रचलन भगवान् श्री कृष्ण के जमाने से ही चला आ रहा है | तब से आज तक गंगा-जमुनी सभ्यता ने गालियों के क्षेत्र मैं जो विकास किया है,वह किसी और क्षेत्र मैं नहीं किया|इसी विकास के क्रम में जो योगदान ब्रज क्षेत्र (भरतपुर,राजस्थान एवं कुछ उ.प्र. ) का है वह वाकई काबिल-ऐ -तारीफ़ है |काफी विकसित और दुर्लभ गालियाँ इस क्षेत्र कि शोभा हैं ,
मैं भी इसी क्षेत्र में पले-बढे होने के कारण,प्रचलित गालियों को सीखने मैं पीछे नहीं रहा,और हर तरह की गालियाँ मैंने सीख ली,अब आप को अगर इस की जरूरत है तो मैं वो गलियों का भण्डार आप के साथ बाँट सकता हूँ |मगर मुझे मालूम हो कि किस तरह की गालियाँ आप ढूंढ रहे हैं ?
क्यों कि गलियाँ भी नाना प्रकार कि हैं,अब जैसे सभ्य और असभ्य (एक दम फूहड़)|
दोंनो ही प्रकार कि गालियों का मेरे पास कोष है,आप को विश्वास नहीं होगा क्षण भर से दो मिनट तक कि गालियाँ मेरे पास है ,जो चंद पलों में ही सामने वाले के पारे को चाँद पर पंहुचा सकती है,और १ गाली तो मेरे पास ६ मिनट कि भी है |जिसका सीधे शब्दों मैं अर्थ जूत-पन्हैय्या या फिर लट्ठ-पटेंगे से कम नहीं है |
जो अवश्य ही आपके नाटक मैं चार चाँद लगा देंगे |

अब रही बात गालियाँ आप तक पहुचाने कि तो मैं ये अद्भुत-कोष (ब्रिज -वासियों KI पुरखापित)आप को सब के सामने तो नहीं दूंगा |बेहतर है आप संकलन कि खातिर इस क्षेत्र का १ बार दौरा अवश्य करें |
या फिर अपना इ-मेल पता मुझे भेज दे (साथ ही मुझे अवगत करायें कि किस कोटि की गालियाँ आप की मांग का हिस्सा हैं ?)