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31.10.10

सिक्को से बन रहे गहने

अखिलेश उपाध्याय / कटनी
रिजर्व बैंक द्वारा एक, दो और पांच रूपये के सिक्के पर्याप्त संख्या में जारी किये जाने के बाद भी अंचल में चिल्लर का संकट दिन-प्रतिदिन गहराता जा रहा है. दुकानदारो ने 25 -50 पैसे को तो चलन से बाहर ही कर दिया है. इससे बाजार में सिक्को की खनक कम हो गई है. वही खुल्ले पैसो के अभाव में लोगो को जहा अनचाही वस्तुए अथवा अतिरिक्त सामग्री खरीदना पड़ती है. दुकानदारो द्वारा ग्राहकों के ऊपर इस कीमत का अतिरिक्त सामान लेने का दबाव आने लगा है. इसी तरह फुटकर दुकानदारो ने खुल्ले पैसे की जगह टाफिया देना आरम्भ कर दिया है. इसके साथ ही कतिपय दुकानदारो, व्यापारियों ने तो सरकार के सामानांतर अपनी निजी मुद्रा बतौर कूपन प्रचलित कर रखी है. इसी तरह किराना दुकान, सब्जी विक्रेता, चाय और पान के ठेला आदि ने ग्राहकों को खरीददारी के बाद एक या दो रूपये लौटाने के एवज में माचिस, गुटखा, पाउच, टाफी इत्यादि विकल्प तैयार कर रखे है. कतिपय होटल संचालको ने तो एक या दो रूपये के अपनी होटल के नाम के कूपन जारी कर रखे है. शहर में निजी मुद्रा का सरेआम चलन किया जा रहा है और प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है.


गहनों में हो रहा उपयोग

सूत्रों के अनुसार कटनी अंचल में सराफा व्यवसाय से जुड़े एवं अन्य लोगो द्वारा सिक्को की कालाबाजारी का काम बड़े ही चालाकी पूर्वक किया जा रहा है. इनका उपयोग वह आभूषण बनाने में कर रहे है. जबकि अन्य प्रदेशो में 25 एवं 50 पैसे के सिक्के आज भी चलन में है. अर्थ व्यथा के नियम के अनुसार प्रत्येक 20 वर्ष में प्रचलित पुराने सिक्को का मूल्य नए सिक्को से ज्यादा हो जाता है. सिक्के आभूषण और अन्य वस्तुओ के काम आने लगते है. इससे निपटने के लिए आर बी आई की कोई तैयारी नहीं होती. पुराने सिक्को के बदले नए सिक्के बाजार में जल्दी नहीं लाये गए तो यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है.


शहर में सब्जी विक्रेताओं का कहना है की उन्हें अपने धंधे में रेजगारी की मजबूरी के चलते 80 रूपये के बराबर ऐसे सिक्के के लिए 100 रूपये देने पड़ रहे है. वही बेकरी, दवाई व परचून की दुकानों पर ग्राहक कोई सामान खरीदता है तो दुकानदार उसे 5 रूपये से कम लौटाने को तैयार नहीं होता. वे एक, दो, तीन, चार रूपये के बकाया को सिक्को या नोटों के बदले चुकाने की बजाय या तो कोई सामान दे देते है या फिर सामान देने से ही मना कर देते है वही 25 -50 पैसे के बदले में टाफी थमा दी जाती है. शराफा बाजारों के आलावा शहर के अन क्षेत्रो में भी पुराने सिक्को से धातु निकालकर गहने बनाने का काम धड़ल्ले से जारी है.



100 के सिक्के 180 रूपये में

सराफा बाजार में एक रूपये के सौ सिक्के 165 से 180 रूपये तक में बिक रहे है. इन सिक्को को गलाकर सराफा व्यवसाय से जुड़े लोगो द्वारा पायजेबी, अगूठी और विछिया बनाये जा रहे है. इसका एक प्रमुख कारण यह है की इन सिक्को से निकलने वाला स्टील एवं निकिल उच्च श्रेणी का होता है. वही इनसे बने आभूशनो की चमक चांदी के समान ही रहती है. दूसरा प्रमुख कारण पिछले कुछ महीनो से दोनों कीमती धातुओ के भाव में आया जबरदस्त उछाल है. इस वजह से सोने-चाँदी के आभूषण गरीब और मध्यम वर्ग की पहुच से बाहर होते जा रहे है. ऐसे में बढती महगाई के इस ज़माने में यदि कोई चीज सस्ती मिलती है तो आम आदमी उसी ओर जल्दी आकर्षित होता है.
 शासन प्रशासन नाकाम

सरकार के लिए छोटी कीमत वाली मुद्रा की व्यस्था काफी कठिन साबित हो रही है. एक और दो रूपये के कागजी नोटों की छपाई तो सरकार ने लगभग बंद कर रखी है. इसके दो कारण है एक तो कागजी मुद्रा की उम्र ज्यादा लम्बी नहीं होती, वही महगा कागज और छपाई की लागत अंकित मुद्रा से कई गुना ज्यादा होती है. इस कारण सरकार ने काफी पहले ही एक दो और पांच के नोटों की जगह सिक्को को बढ़ावा देने की नीति अपना ली थी. एक, दो रूपये के सिक्को की किल्लत की वजह इनमे प्रयुक्त धातु का महगा होना है यानि सिक्को को गलाने पर धातु को बेचकर उनके अंकित मूल्य से अधिक कीमत मिल जाती है. सरकारी मुद्रा को जलाना और गलाना दोनों ही अपराध है पर सरकार इस गोरखधंधे को रोक पाने में अक्षम है.

5 comments:

shalini kaushik said...

akhilesh ji,
matra vahi nahi sabhi pradeshon me yah ho raha hai.aapne sarthak jankari di hai prashasan ki laparvahi ka khamiyaja janta ko bhugatna hi padta hai.

brajkiduniya said...

सिक्कों की कालाबाजारी सिर्फ हमारे यहाँ ही नहीं हो रही बल्कि दूसरे देशों में इन्हें तस्करी के जरिये भी भेजा जा रहा है.इस काम में मुख्य रूप से बंगलादेशी घुसपैठी लगे हुए हैं.देश में इस समय केंद्र सरकार नाम की कोइ चीज है ही नहीं इसलिए इस पर रोक लगने की उम्मीद करनी ही बेकार है.

केवल राम said...

अगर ऐसा ही होता ही रहा तो हम कहाँ अपने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर पाएंगे यह सब कुछ होना हमारे लिए बहुत घातक है , इन सब बातों पर शीघ्र विचार करने की जरुरत है .
अर्थपूर्ण पोस्ट

गिरीश बिल्लोरे said...

ज़रूरी खबर
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एक नज़र इधर मेरी ताज़ा-पोस्ट पर
दर्शन बावेजा
ताज़ा पोस्ट विरहणी का प्रेम गीत
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एस.एम.मासूम said...

अफ़सोस की बात है आप सबको दिवाली की शुभ कामनाएं  आज आवश्यकता है यह विचार करने की के हम हैं कौन?