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19.11.10

insaniyat ka dariya

आज के भौतिकतावादी युग में हर इंसान दूसरे से आगे निकल जाना चाहता है .हम खुद को इंसान तो कह लेते है पर क्या इंसानियत को सही तरह समझ पाए है ? हम आज जिस आचरण    को अपना रहे है वो तो पशु आचरण  है .आज आवश्यकता  है की हम प्रभु से ये प्रार्थना  करे --
    ''किसी की आँख क़ा आंसू मेरी आँखों में आ छलके...[आगे देखे insaniyat ka dariya ]

1 comment:

shalini kaushik said...

agar aise hi bhavon se har insan bhar jaye,to duniya se dukh ka andhera hat jaye.bahut achha kaha....soti insaniyat ko jaga degi ye kavita....