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17.11.10

nirnay le janta

पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर इलाके के ललिता पार्क में १५ नवम्बर २०१० की रात को पांच मंजिला बिल्डिंग दह गयी.हादसे में अब  तक  ६७ लोगों के मरने की खबर है और  ८२ लोग घायल हैं.मलबे में अभी तक दर्जनों लोगो के दबे होने की आशंका जताई जा रही है.पूर्वी जिला पुलिस ने बिल्डिंग मालिक अमृतपाल सिंह को गैर   इरादतन   हत्या का केस दर्ज कर देर शाम गिरफ्तार कर liya .दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित,उप-राज्यपाल तेजेंद्र खन्ना सहित दिल्ली सरकार के कई मंत्री विपक्ष के नेता विजय कुमार मल्होत्रा  समेत कई बड़े नेता घटना स्थल पर पहुंचे .शीला दीक्षित ने मरने वालो के परिजनों को २ लाख ,घायलों को १ लाख  और अनाथों को ५० हज़ार रूपये देने की घोषणा की. ये सब घटित हुआ जो हर घटना पर घटित होता है किन्तु जो होना चाहिए वह सब कहाँ है?कब होता है?ये सवाल हर भारतीय के आगे मुह बाये खड़े हैं.
                               बड़े-बड़े नियम कानूनों के आधार पर ऐसी बिल्डिंगें बनती हैं और इनके बनने में जिसकी सबसे ज्यादा अनदेखी की जाती है वह भारतीय कानून ही है.हर घटना घटने पर ऐसी ऐसी कई कार्यवाहियां करने की बाते की जाती हैं जिनसे आगे ऐसी घटनाएँ ना घटें किन्तु जैसे ही कुछ दिन बीतते हैं बात आयी गयी हो जाती है .जनता जो घटना घटने पर आक्रोशित होती है धीरे-धीरे रोज़ी-रोटी में व्यस्त होती जाती है और खुद भी ऐसे कार्यो में भागीदार बन जाती है.आज जगह जगह ऐसे भवन अस्तित्व में हैं जो बनने के साथ ही विनाश की और अग्रसर दिखाई देते हैं और ये हमारी जनता की ही कार गुजारी है जो भ्रष्टाचार के दलदल में समाती जा रही है और अपने व अन्य लोगों के लिए समस्याएँ खडी कर रही है .सरकारी रवैया तो ऐसी घटनाओ पर ऐसा ही होता है जैसा की यहाँ दिखाई दे रहा है और जैसा कि एक कवि महोदय कहते हैं:
 "सब्र को दरिया कर देते हैं,आंसू को रुसवा कर देते हैं.
 जख्म पे मरहम रखने वाले जख्म को गहरा कर देते हैं."
                          तो  ऐसे में यह कर्त्तव्य जनता का ही बनता है कि वह ऐसी घटनाओ से सबक लेते हुए न तो ऐसी बिल्डिंगे खुद बनाये  और न ही ऐसी बिल्डिंगे बनने दे और यदि ऐसी कोई घटना इस सबके बावजूद भी घट जाती है तो प्रशासन को ऐसी चुनौती दे कि वह आगे से सही कार्यवाही करे और ऐसी घटनाओ कि पुनरावृत्ति ना होने दे.

1 comment:

shikha kaushik said...

aapne bilkul sahi baat kahi hai-ye janta ka hi kartvya hai ki vo khud bhi imandaari se niyamon ka palan kare .tabhi ham galat logon ko rok payege.