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19.12.10

मां

आज मुझे एक एसएमएस मिला। यह एसएमएस वैसे तो हर दिन आने वाले एसएमएस की तरह ही था लेकिन उसके मायने कुछ खास थे। आप भी देखिए।
‘ एक छोटा सा बच्चा अपनी मम्‍मी के साथ जा रहा था। रास्‍ते में एक पुल पर पानी बहुत तेजी से बह रहा था। मम्‍मी कहती है, बेटा डरो मत, मेरा हाथ पकड लो। बेटा कहता है नहीं मम्‍मी आप मेरा हाथ पकड लो। अब मम्‍मी मुस्‍कुराते हुए कहती है, दोनों में क्‍या अंतर है बेटा? बेटा कहता है, अगर मैं आपका हाथ पकडूं और अचानक कुछ हो जाए तो शायद मैं आपका हाथ छोड दूं लेकिन मैं यह जानता हूं कि  यदि आप मेरा हाथ पकडेंगी तो चाहे कुछ भी हो जाए आप मेरा हाथ कभी नहीं छोडेंगी।
ऐसी होती है मां।
अतुल श्रीवास्‍तव

atulshrivastavaa.blogspot.com

3 comments:

shikha kaushik said...

bahut hi yatharth ko chooti hui prastuti .ma ! aisi hi hoti hai .itni pyari charcha ke liye aapka hardik dhanywad .mere blog ''vikhyat'' par aapka hardik swagat hai .

ajit gupta said...

हाँ यह लघुकथा कई वर्ष पूर्व पढी थी। उसमें दादा और पोते का हाथ था। लेकिन आपने जिस भाव से कथा लिखी गयी है उसका भाव बदल दिया है। भाव यह है कि यदि आप पकड़ेंगे मेरे हाथ तो आप मुझे सुरक्षित ले जाएंगे लेकिन यदि मैं पकडूंगा तो मैं अपना रास्‍ता बनाना सीखूंगा।

वन्दना said...

अटल सत्य्।