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23.12.10

मेरा आखिरी पत्र

मेरी प्यारी सपना
हो सके तो मुझे माफ़ कर देना |वैसे मैंने अपनी इस छोटी जिंदगी में जितनी गलतियां , नहीं गलती कहना एक और गलती होगी मैंने जितने पाप किये हैं उसके लिए तो शायद भगवन भी माफ़ न कर सके | सच कहूँ तो मैं दौलत की लालच में अँधा हो गया था बिल्कुल अँधा |जानता हूँ आत्महत्या कायर लोग करते हैं पर मैं जीकर भी तो हरपाल मरता हीं रहूँगा, दिल पर इतना बोझ लेकर, इतनी आंहे लेकर मैं नहीं जी सकता | आत्महत्या कानून की नजर में अपराध है, तो मैं कानून पर चला हीं कितना हूँ ? मैं भी तो एक अपराधी हीं हूँ | इस दूनिया से जाने से पहले मैं अपने दिल की बात तुम्हे बताना चाहता था पर मैं कह नहीं सकता इसलिए
ये पत्र लिख रहा हूँ | इस इन्टरनेट के ज़माने में पत्र अजीब लगता है न पर सपना यह पत्र नहीं मेरे जीवन का सारांश है | बचपन से मुझे अच्छे स्कूल में पढाया गया वँहा बहुत से आमिर बच्चे भी थे जिनकी रईसी देख मैं ललच जाता था | बिल्कुल तुम्हारी तरह माँ भी समझाती रहती थी | मैं काफी तेज़ स्टुडेंट भी था ये तो तुम जानती हीं हो | मेरी महत्वाकांक्षाएं भी काफी बड़ी थीं | जिस दिन I.I.T के लिए मेरा सेलेक्सन हुआ था माँ इतनी खुश थीं मनो मैं विश्व विजय करके लौटा हूँ | आज जब अतीत के पन्नों पर झांकता हूँ तो लगता है जैसे मेरे जीवन का सबसे काला दिन वही था |कितने कोचिंग वालों ने contact किया था मुझसे| कोई ५० हज़ार तो कोई ७५ हज़ार देने को तैयार थे सिर्फ अपना फोटो और लिखित प्रमाण देने के लिए की मैंने उनकी कोचिंग से पढाई की है | पापा ने माना किया पर मैंने अपनी कसम देकर उन्हें मना लिया| उस दिन एक दिन में मैंने डेढ़ लाख कमाए थे | उसी दिन से मेरे सर पर दौलत का भुत स्वर हो गया | पहला सेमेस्टर ख़त्म हीं हुआ था की एक कोचिंग वाले सर ने फिर मुझसे कांटेक्टकिया और कहा आने वाले एंट्रेंस एक्साम में एक लडके की जगह तुम्हे परीक्षा देनी है ३ लाख मिलेंगे | एक परीक्षा और ३ लाख मैं बहुत खुश हुआ पर पापा मम्मी  की ईमानदारी का
सबक याद आ गया | मैंने अनमने ढंग से कहा सेटिंग  नहीं सर ये गलत है |शायद उन्होंने ३ लाख के नाम पर मेरी आँखों में आये चमक को भांप लिया था |मुझे समझाने लगे की ये तो समाज सेवा है बेचारे जो बच्चे खुद से पास नहीं कर पते उन्हें पास करना है और ऊपर से पैसे भी तो मिल रहे हैं |मुझे पुलिस के डंडे से भी बहुत डर लगता था | उन्होंने मेरे सिनिअर से मिलाया जो  पहले से इस काम में था, उसे ५ लाख मिल रहे थे | वह बड़े स्तर की परीक्षा  देने वाला था मुझे तो स्टेट लेवल देना था अनुभवी नहीं था न |उसके बाद मैं आगे बढ़ता गया या कह लो जुर्म की दलदल में धंसता गया | बहुत बड़ा दल था, मेडिकल, इंजीनियरिंग, रेलवे सबका सेटिंग कराया जाता था और सेटिंग भी तरह तरह के |पता है मैं पहले सोचता था कि लडकियां रिस्क नहीं लेतीं पर उस दल में शामिल होने पर पता चला कि लडकियां यंहा भी पीछे नहीं है |हमारी शादी के बाद जब तुमने समझाया मैंने कोशिश की पर छोड़ नहीं पाया |तुमसे झूठ कह दिया कि मैंने गलत काम छोड़ दिया | अब मैं परीक्षा देता नहीं बस बच्चों को तैयार करता हूँ उस कोचिंग वाले सर कि तरह | तुमसे ज्यादा वफादारी मैंने उन लोगों के साथ निभाई है | सबसे हेड कौन है
ये तो मैं आज भी नहीं जानता पर कैसे कैसे सेटिंग होता है मैं सब जानता हूँ | जब हमे ज्यादा स्टुडेंट्स मिल जाते हैं उस बार पूरे सेंटरको हीं खरीद लिया जाता है| स्टुडेंट्स भी अपने, इन्विस्लेटर भी अपने और गार्ड्स भी अपने | जँहा एक दो स्टुडेंट्स होते हैं उनके लिए मेहनत ज्यादा करनी पड़ती है | उनके जैसे मिलते जुलते चेहरे वाले बच्चे को ढूंढा जाता है फिर हमारे फोटोग्राफर दोनों बच्चों के चेहरे को मिलाकर फोटो बनाते हैं |खैर मैं तुम्हे डिटेल में क्यूँ बताऊँ ? कंही तुम भी सेटिंग करने लगी तो ........हाहा हा हा just kidding yaar .जीवन में मेरी यह आखिरी हँसी है (हँसने का मुझे हक है भी नहीं ) कितने बच्चों का कैरिअर बर्बाद किया है | कितने हीं बच्चों ने आत्महत्या तक कर ली | सोचकर बुरा लगता था पर पैसे देख सब भूल जाता था मैं | जिन बच्चों को मैंने पास कराया उनके लिए भी तो गलत हीं किया | मैं सब भूल सकता हूँ पर रवि कि मौत नहीं | उसे इस दलदल में लेन वाला तो मैं हीं था | हम दोनों ने साथ में इन सब कामों को छोड़ना चाहते थे | हमारे खिलाफ बहुत सबूत थे उन लोगों के पास, मैं डर गया उन लोगों की धमकी से पर रवि नहीं डरा | उसने  आत्मसमर्पण कर दिया संयोग से ईमानदार इंस्पेक्टर भी मिल गया पर नतीजा क्या हुआ ?रवि को मार डाला गया और क़त्ल के इल्जाम में वह इंस्पेक्टर जेल गया | रवि इस दूनिया में नहीं रहा उसके गम में चाची मर गयी चाचा पागल हो गए सब की वजह मैं हूँ |उस इंस्पेक्टर के २ बच्चे अनाथों की जिन्दगी जी रहे हैं मेरी हीं वजह से | कहते हैं जब जागो तभी सवेरा पर हमारे जुर्म की दुनिया में जिसका जमीर जग जाता है उसके जीवन में अँधेरा छा जाता है | इतने सारे पापों का बोझ लेकर मैं नहीं जी सकता सपना नहीं जी सकता मैं | मेरे सारे गुनाहों की तो माफ़ी मिल नहीं सकती |तुम्हारे साथ तो मैं सात वचन तक निभा नहीं सका | हो सके तो मुझे माफ़ कर देना सपना |
तुम्हारा (कभी बन नहीं सका )
अविरल

6 comments:

संजय भास्कर said...

बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

Anonymous said...

kya ye patra sachcha hai ya ye bhi
jhutha hai

आलोकिता said...

Thanka Sanjay ji

आलोकिता said...

chooti baat ji patr jhutha hai awiral nai Alokita ne likha hai ise par aisa hota hai samaj mein. Setting young gen k liye bahut badi samsya hai

Prem Arora 09012043100 said...

बहुत ही अच्छा लिखा थोडा लम्बा लिखा पर सटीक है पर इस लेखनी ने एक बार तो झकझोर कर दिया पर लगता है की अब आपको और जी कर ऐसे ही लेखनी लिखनी चाहिए. दिल से सुभ कामनाएं
प्रेम अरोड़ा काशीपुर
9012043100

आलोकिता said...

Prem ji thanks