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22.12.10

सिर्फ और सिर्फ मैं

सिर्फ और सिर्फ मैं ................
सिर्फ और सिर्फ तुम्हारे साथ
मैं ....
चांदनी रात में,
समंदर किनारे ,
गीली रेत पर बैठकर ,
भर लेना चाहती हूँ
आँखों में अपनी तेरे चेहरे का नूर और ......
लेकर हाथो में हाथ ,
चलना चाहती हूँ ,
तेरे कदमो के निशान से ,
अपने कदम मिलाकर
बहाँ जहाँ डूबता हे सूरज सागर में कही दूर ,
सिर्फ और सिर्फ तुम्हारे साथ
मैं ................................
संगीता मोदी "शमा"

6 comments:

Dr Om Prakash Pandey said...

bahut hee sundar !

वन्दना said...

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (23/12/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
http://charchamanch.uchcharan.com

babanpandey said...

बहुत सुंदर ...
कभी मेरे ब्लॉग पर भी आये /
आज मेरी भी एक रचना चर्चा मंच पर थी /

babanpandey said...

बहुत सुंदर ...
कभी मेरे ब्लॉग पर भी आये /
आज मेरी भी एक रचना चर्चा मंच पर थी /

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

खूबसूरत एहसास

अनामिका की सदायें ...... said...

khoobsoorti se daal diya man ke ehsaaso ko kavita ke roop me.