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12.2.11

---- चुटकी---

सुना है हर
पतझड़ के बाद
आता है बसंत,
पता नहीं
मेरे जीवन के
पतझड़ का
कब होगा अंत।

1 comment:

पद्म सिंह said...

क्या खूबसूरती से चंद लाइनों मे जीवन उड़ेल दिया... अति सुंदर!!!