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23.3.11

तुम हरामी नहीँ हो

माफ करना,
तुम हरामी नहीँ हो
और हरामजादा भी नहीँ।
लेकिन,
जो कुछ भी तुम हो -
उसके लिए -
यह दोनोँ शब्द -
हरामी और हरामजादा -
बहुत छोटे हैँ।
क्योँकि -
हरामी और हरामजादे -
अपनी वल्दियत नहीँ जानते,
और तुमने,
अपनी माँ को -
योरप, अमेरिका, चीन और अरब की गलियोँ मेँ,
नीलाम कर दिया।
www.atharvavedamanoj.jagranjunction.com

2 comments:

akhtar khan akela said...

shi khaaa aese logon ke munh par behtrin tmaacha jdaa he . akhtar khan akela kota rajsthan

Manoj Kumar Singh 'Mayank' said...

धन्यवाद अख्तर भाई,
वस्तुतः राजनीतिज्ञोँ को किस नाम से सम्बोधित करुँ, यह समझ मेँ ही नहीँ आया सो लिख दिया।