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29.5.11

मेरी बेटी


मेरी  बेटी                                               ''गूगल से साभार ''

फूल सी प्यारी है वो और मखमल सी नरम ,
है चपल तितली के जैसी ;रेशमी उसकी छुअन ,
दौड़ती खरगोश सी,कोयल के जैसी बोलती,
मीठी-मीठी बातों से कानों में अमृत घोलती ,
खिलखिलाती धूप-सम ;मुस्कुराती चांदनी,
बाँटती खुशियों के मोती ,क्रोध में है दामिनी ,
वो क्षमा है ,वो शिवा है,वो है काली-भैरवी , 
वो जया है ;वो है दुर्गा,वो है सारा-वाभ्रवी,
मुझसे ही जन्मी है वो ,मेरा ही तो रूप है ,
सृष्टि की संचालिका ,अनुपम है वो अनूप है .
                                         शिखा कौशिक


11 comments:

वन्दना said...

बहुत प्यारी रचना।

वन्दना said...

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (30-5-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

http://charchamanch.blogspot.com/

Anjana (Gudia) said...

pyarbhari sunder rachna! :-)

आशा said...

आपकी बेटी बड़ी प्यारी लगी| बहुत बहुत बधाई
आशा

सदा said...

बहुत ही अच्‍छी रचना ।

(कुंदन) said...

बहुत प्यारी कविता है :)

Kailash C Sharma said...

बहुत सुन्दर रचना..

surendrshuklabhramar5 said...

शिखा जी बेटी बहुत प्यारी लगी-सुन्दर रचना - लेकिन क्रोध में आइये हम उसे दामिनी --लेकिन क्यों नहीं आज जब लोग बादल सा छा जाते हैं अंधकार कर देते हैं जीवन में तो दामिनी और दुर्गा चंडी का रूप भी रखना है उसमे -

खिलखिलाती धूप-सम ;मुस्कुराती चांदनी,
बाँटती खुशियों के मोती ,क्रोध में है दामिनी ,
बधाई हो आप को
शुक्ल भ्रमर ५

संध्या शर्मा said...

बहुत सुन्दर रचना.. आपकी बेटी बड़ी प्यारी लगी....

शिखा कौशिक said...

Vandna ji ,Anjana ji ,asha ji ,sada ji ,surendra ji ,kundan ji ,kailash ji ,sandhaya ji -utsahvardhan hetu dhanywad .

Dr Om Prakash Pandey said...

behtareen!