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23.5.11

ॐ जय जगदीश हरे : आरती ? क्यों नहीं ! भरास ही तो है

om jai jagdeesh hare ॐ जय जगदीश हरे



Om Jai Jagdish Hare is the most popular of the Hindu aartis. Composed sometime around 1870s by Pandit Shardha Ram Phillauri in Punjab, India , now it is sung around the world by Hindus of all background. Even though it is in Hindi, it is universally used by Hindus speaking any of the numerous Indian languages, or belonging to any one of many sects. It may have been inspired by Dashavatara (दशावतार कीर्ति धवलम्) section of Gita Govinda of Jayadeva, a lyrical composition of 12th century, which has the same refrain:

The prayer is sung at the time of aarti

(Source: Wikipedia)

LYRICS:
ENGLISH
HINDI


ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे .
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे ..

जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का .
सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का ..

मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी .
तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी ..

तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतरयामी .
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी ..

तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता .
मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता ..

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति .
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति ..

दीनबंधु दुखहर्ता, तुम रक्षक मेरे .
करुणा हस्त बढ़ाओ, द्वार पड़ा तेरे ..

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा .
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा ..

तन-मन-धन सब है तेरा ।
तेरा तुझको अर्पण, क्या लागे मेरा ॥

4 comments:

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

कह नहीं सकते,

तीसरी आंख said...

very nice

GUDU said...

प्रभु भक्ति से ही परम पिता परमात्मा के दर्शन होते है

GUDU said...

भक्तिमय