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24.7.11

शेष नारायण सिंह को सुझाव

गीता के नाम पर शिक्षा को साम्प्रदायिक रंग दे रहे हैं बेल्लारी के नवाब
Written by शेष नारायण सिंह
कर्नाटक के एक मंत्री का बयान आया है कि कर्नाटक के स्कूलों में हिन्दुओं के धर्मग्रन्थ गीता को जो नहीं स्वीकार करेगा उसे यह देश छोड़ देना चाहिए. कर्नाटक के सरकारी स्कूलों में गीता के अध्ययन को लगभग अनिवार्य कर दिया गया है. इसके बारे में जब शिक्षा विभाग के मंत्री से बात की गयी तो उन्‍होंने कहा कि गीता इस देश का महाकाव्य है और उसे भारत में रहने वाले हर व्यक्ति को सम्मान देना चाहिए. इस मंत्री को शायद पता नहीं है कि गीता महाकाव्य नहीं है, वह महाभारत महाकाव्य का एक अंश मात्र है.
थोडा और घिरने पर मंत्री महोदय और बिखर गए. कहने लगे कि स्कूलों में चल रहा गीता वाला कार्यक्रम कोई सरकारी योजना नहीं है. उन्होंने जानकारी दी कि उत्तर कन्नड जिले के सोंध स्वर्णावली मठ के ओर से वह कार्यक्रम चलाया जा रहा है. यानी राज्य के सरकारी स्कूलों में एक गैर सरकारी संस्था अपना कार्यक्रम चला रही है और राज्य सरकार का एक मंत्री उसकी पक्षधरता इस तरह से कर रहा है, जिससे देश की बहुत बड़ी आबादी अपमानित महसूस कर सकती है. कर्नाटक के शिक्षा मंत्री के इस बयान से वह बात तो साफ़ हो ही जाती है जो वह कहना चाह रहा है, लेकिन एक बात और साफ़ हो जाती है वह यह कि कर्नाटक में जो समाज और स्कूली शिक्षा के साम्प्रदायीकरण का आभियान चल रहा है उसमें सरकार ऐसे लोगों को इस्तेमाल कर रही है जिन का सरकार से कोई लेना देना नहीं है.

जब कभी सवाल उठेगा तो सरकार साफ़ मुकर जायेगी कि इस तरह का कोई अभियान कभी चला था. इस तरह की कारस्तानी का कोई आडिट आबजक्शन भी नहीं होता. इस मंत्री का बयान किसी ऐसे आदमी का बयान भी है जो गीता में दिए गये उपदेशों को बिलकुल नहीं समझता. गीता के अठारहों अध्यायों में कहीं भी ऐसा ज़िक्र नहीं है कि कहीं किसी ने ज़बरदस्ती की हो. सच्चाई यह है कि गीता का उपदेश ही दुर्योधन की ज़बरदस्ती के खिलाफ संघर्ष करने के लिए दिया गया था. गीताकार कृष्ण ने हमेशा किसी भी जोर ज़बरदस्ती का विरोध किया है. पूरी गीता में आपको कहीं कोई ऐसा सन्दर्भ नहीं मिलेगा जहां कृष्ण ने अर्जुन को कुछ भी करने का आदेश दिया हो. पूरी गीता में कृष्ण अर्जुन को समझा बुझाकर ही उन्हें युद्ध करने की प्रेरणा देना चाहते हैं. जबकि इस मंत्री के बयान से साफ़ है कि वह अगर ज़रुरत पड़ी तो जोर ज़बरदस्ती की बात भी कर सकता है. उसकी इस बयानबाज़ी की निंदा की जानी चाहिए. ............

सिंह साहब के लेख पर मेरा सुझाव



सिंह साहब आप बिलकुल सही कह रहे हैं| इस देश में सांप्रदायिकता का नोमो निशान मिटा देना चाहिए| सिर्फ और सिर्फ धर्मनिरपेक्षता का ही बोल बाला होना चाहिए| आखिर यही तो लादेन जी का सपना और सोनिया मैया की इच्छा है| सांप्रदायिक एवं लक्ष्य केन्द्रित हिंसा निवारण ( न्याय प्राप्ति एवं क्षतिपूर्ति ) विधेयक २०११ के लागू हो जाने पर तो हमारा देश इस संसार में एक अनोखा धर्मनिरपेक्ष देश बन जायेगा| कायदे से तो इस देश में से राम, कृष्ण, सनातन धर्म, राष्ट्र प्रेम, भाषा, संस्कृति आदि का समूल विनाश कर देना चाहिए और सारे मंदिरों को तोड़ कर मस्जिद का निर्माण कर देना चाहिए| देश में पांचो वक्त की नमाज़ अनिवार्य रूप से लागू कर देना चाहिए| जो न करे उसे फांसी पर लटका देना चाहिए| आखिर इतिहास का महान धर्मनिरपेक्ष शासक औरंगजेब भी तो यही चाहता था| अगर हो सके तो देश के सारे हिन्दुओ का कानून बना कर अनिवार्य रूप से धर्म परिवर्तन करा कर मुस्लमान बना देना चाहिए और जो न बने उसे तत्काल मौत के घाट उतार देना चाहिए| तभी जा कर इस देश में पूरी तरह से धर्मनिरपेक्षता का बोल बाला होगा| अल्लाह से (भगवान का नाम लेना तो सांप्रदायिकता का परिचायक है) यही प्रार्थना है कि वो आपकी इच्छाओं और सोनिया मैया का सपना जल्द से जल्द पूरा करे|

1 comment:

Dr. O.P.Verma said...

सर,
आपने मेरे मन की बात कही है।
आपको कोटि-कोटि नमन।
साधुवाद।
Dr. O.P.Verma
M.B.B.S.,M.R.S.H.(London)
President, Flax Awareness Society
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