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30.9.11

भड़ास मित्रों से सलाह लेनी है

* अपने भडासी मित्रों से मैं यह सलाह लेना चाहता हूँ कि क्या मुझे भड़ास पर लिखना बंद कर देना चाहिए ? कारण यह है कि मेरे लेखन की मात्रा ज्यादा है - विभिन्न विषयों पर भिन्न कोण से , और तमाम कवितानुमा रचनाएँ । मुझे कोई दिक्कत नहीं है । मैं तो अपने ब्लॉग पर लिखता ही हूँ । उसी को फक्कड़ बाबा और भड़ास पर भी डाल देता हूँ , इस लिहाज़ से कि पठन का दायरा बढ़ जाता है , और कमेंट्स भी मिल जाते हैं । लेकिन लगता है कुछ पाठकों को यह नागवार गुज़रता है । आलोचना बुरी नहीं लगती क्योंकि यह तो भड़ास है ही । तो भड़ास इ की स्वतंत्रता मुझे होनी चाहिए थी ? पर कुछ लोग स्वयं और भड़ास दूसरों के भड़ास पर भड़ास निकालने के लिए करते हैं जो उचित नहीं है । इसीलिये मैं निष्पक्ष , स्वतंत्र लेखकों से यह राय लेना चाहता हूँ कि क्या मैं अपना लेखन भड़ास पर न डालूँ ? Anonymous ने तो मुझे भौंकना बंद करने की सलाह दी है । अब शेष पाठकों और Mr यशवंत सिंह की राय जानना चाहता हूँ । तब तक मैं भड़ास पर कुछ नहीं लिखूंगा । मेरा ईमेल पता है -priyasampadak@gmail.com / Mobile - 9415160913 | Thanks in advance .

3 comments:

तेजवानी गिरधर said...

u should write

I and god said...

मना करने वालों से डर गए क्या ?

हम आपके साथ हैं . जरुरत पड़ी तो अनशन पर बैठ जाउंगा .

वैसे जब तक श्री यशवंत सिंह जी कुछ न कहें , आप किसी की परवाह क्यों करते हैं.

मैं आपके विचारों से बिलकुल सहमत नहीं हूँ. पर में विचारून कि स्वतंत्रता का सम्मान कर्ता हूँ .

जब तक आलोचना नहीं होगी , सुधर कैसे होगा .

दासानुदास
अशोक गुप्ता

Ugra Nath Nagrik said...

धन्यवाद तेज जी | अशोक जी ! डर नहीं, आदर | पाठक की भावनाओं का सम्मान तो करना ही पड़ता है | सत्यंब्रूयात प्रियं ब्रूयात | फिर मैं अपने ब्लॉग [ nagriknavneet.blogspot.com ] पर तो लिखता ही हूँ ! मेरे घर आकर कोई गाली दे जाय तो स्वीकार होगा | किसी के घर जाने पर यदि ' हिय हर्षत नहीं ' तो " तुलसी वहां न जाइए " | वैसे आपके आदेश की अवहेलना भी संभव नहीं | देखता हूँ , कुछ " मीठा मीठा गप्प " डाला जा सकता है , लेकिन " कडवा - कडवा थू " तो नहीं | उसके लिए फेस बुक पर " बेबाक आवाज़ " ,"Honest and creative people" तो हैं ही | इतना तो निश्चित है कि मैं विचारों में ही कठोर हूँ , पर ह्रदय से अत्यंत संवेदनशील [ तभी कटुसत्य टप्प से पकड़ में आते हैं ] , और नेताओं की तरह मोटी खाल का तो हूँ ही नहीं |























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