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27.10.11

मेरी उलझन !

मेरी उलझन !

आज दीपावली के बाद का दिन है । आज गोवर्धन पूजा का दिन है । लखनऊ की स्थानीय भाषा में इसे जमघट भी कहते हैं । यह दिन आम तौर पर पड़ेवा के नाम से भी प्रचलित है । पुराने लखनऊ के लोग आज के दिन को कनकउआ (पतंग) के पेंच लड़ा कर मनाने के लिये पूरे साल भर इंतजार करते हैं । यह मूलत: छुट्टी का दिन है । साल भर काम की रेलम - पेल के बाद राहत के कुछ पल स्वत: ही जीवन में प्रवेश करते दिखतें हैं । और वो भी इतने बेहतर तरीके से और इतने मुफीद मौके पर | वाह !

व्यापारी परिवारों में इस दिन कारोबार बंद रहता है । या एक प्रकार से वर्जित होता है । हर वर्ष की भांति आज सुबह - सवेरे ही माँ ने हिदायत दे डाली की आज "लिखा - पढ़ी का कोई काम न करना ।" ऐसा शायद इसलिये की साल - भर कलम चलाने के बाद एक दिन चित्रगुप्त जी भगवान ने अपने लिये भी छुट्टी मांगी होगी । कायस्थ बन्धु आज के दिन कलम - दवात की पूजा करतें हैं

पर मेरी उलझन यह है कि कागज कलम का प्रयोग तो हो नहीं रहा । पर जब मैं यह पोस्ट फेसबुक पर लिख रहा हूँ तो क्या इस नियम का उल्लघंन होगा ? क्या माँ और चित्रगुप्त जी महाराज नाराज तो नहीं हो जायेंगें ?

कॊई मदद करेगा क्या ?

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