Bhadas ब्लाग में पुराना कहा-सुना-लिखा कुछ खोजें.......................

Loading...

: जय भड़ास : दुनिया के सबसे बड़े हिंदी ब्लाग में आपका स्वागत है : 888 सदस्यों वाले इस कम्युनिटी ब्लाग पर प्रकाशित किसी रचना के लिए उसका लेखक स्वयं जिम्मेदार होगा : आप भी सदस्यता चाहते हैं तो मोबाइल नंबर, पता और प्रोफाइल yashwantdelhi@gmail.com पर मेल करें : जय भड़ास :

10.12.11

गूंगी बस्ती ...........

गूंगी बस्ती ...........
गूंगी बहरी जिन्दी लाशें, हर तरफ बिखरी पड़ी है .
आज यहाँ की सारी बस्ती, दिन में भी सोयी पड़ी है.

बस्ती में बसते गूंगों को, सही गलत की कहाँ पड़ी है.
जान बची तो लाखों पाये,मरते सच की किसे पड़ी है.

लड़ पड़ते छोटी बातों पर, बड़ी बात की किसे पड़ी है.
मेरी माला - तेरी टोपी,हर बात यही पर फँसी पड़ी है.

आग लगी है जिसके घर में,तुमको उसकी क्यों पड़ी है.
बुझ जाये तो मिल के आना,जंग लड़ने की कहाँ अड़ी है.

लुटपाट चोरी मक्कारी, दलदल में यह नाव धंसी है.
चोर लुटेरे करे फैसले ,सच सुने ,कहे,तो मौत खड़ी है.  

0 comments: