अगर कोई बात गले में अटक गई हो तो उगल दीजिये, मन हल्का हो जाएगा...
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बहुत ख़ूबसूरती से एक व्यथा को परिभाषित किया ..उम्दा
आदरणीय डॉ. नूतन जी,यथायोग्य अभिवादन्। व्यथा में खूबसूरती तलाशने के लिये शुक्रिया? सरहाने के लिये शुक्रिया।रविकुमार बाबुल ग्वालियर
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3 comments:
बहुत ख़ूबसूरती से एक व्यथा को परिभाषित किया ..उम्दा
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आदरणीय डॉ. नूतन जी,
यथायोग्य अभिवादन्।
व्यथा में खूबसूरती तलाशने के लिये शुक्रिया? सरहाने के लिये शुक्रिया।
रविकुमार बाबुल
ग्वालियर
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