Bhadas ब्लाग में पुराना कहा-सुना-लिखा कुछ खोजें.......................

21.12.11

कसाब को फाँसी दो वरना कुर्सी खाली करो।

दोस्तों, आपको 26/11/2008 का दिन तो याद ही होगा।यह वही दिन था जिस दिन 10 आतंकवादियों के एक समूह ने, जिनका संबंध लश्कर-ए-तैबा से था, भारत के वित्तीय राजधानी मुंबई को बमबारी और गोलीबारी से दहला दिया था।इन आतंकवादियों के निशाने पर आया होटल ताज, ओबेराय होटल और छत्रपति शिवाजी टर्मिनल।26/11/2008 से शुरूआत हुई आतंकवादियों के इस खूनी खेल की जो भारत के जवानों के कुर्बानियों और सफल प्रयासों से 29/11/2008 को खत्म हुआ।इस दुर्घटना के परिणाम स्वरूप लगभग 164 लोगों की जान चली गई जिन में से नौ आतंकवादी भी थे और लगभग 304 लोग बुरी तरह से जख्मी भी हुए थे।इन दस आतंकवादियों में से एकमात्र जिंदा आतंकवादी पकड़ा गया था मोहम्मद अजमल आमिर कसाब।
     अजमल कसाब पर 3 मई 2010 को एक भारतीय न्यायालय ने मर्डर, आतंकवादी वारदातों को अंजाम देने सहित और भी कई आरोपों पर मुकदमा चलाया था।6 मई 2010 को उसी न्यायालय ने कसाब पर मुंबई बम धमाकों के आरोप सहित नौ आरोपों को साबित कर उसे फाँसी की सजा सुनाई थी।कसाब ने मुंबई उच्च न्यायालय में एक याचिका भी दाखिल की थी जिसे खारिज करते हुए न्यायालय ने फाँसी की सजा बरकरार रखी थी।तब से लेकर पिछले 1 साल से भारत सरकार की नाकामी की वजह से अजमल आमिर कसाब की फाँसी लटकी हुई है।
     एक आतंकवादी को भारत सरकार आज तक फाँसी नहीं दिलवा पाई।फाँसी तो दूर की बात है भारत सरकार ने तो उसे भारत का मेहमान बना के रखा हुआ है।एक आतंकवादी को जेल में चिकन, बिरयानी सहित तमाम सुविधाएँ मिली हुई हैं।मुझे डर तो इस बात का है कि अगर अगले 1-2 साल तक भी यही हाल रहा तो कहीं भारतीयों का आदर्श न बन जाए कसाब।आखिर किस नौकरी, व्यवसाय में इतनी सुख-सुविधा मिलेगी जितनी कि कसाब को मिल रही है।स्वयं भारत सरकार की ओर से शाही पकवान और सवारी का आनंद उठा रहे हैं कसाब।क्या भारत सरकार के पास एक आतंकवादी की गंदी राजनीति के तहत खुशामद करने के अलावा और कोई काम नहीं रह गया है।
     भारत सरकार 26/11 के मुंबई बलास्ट के लिए पाकिस्तान को दोषी करार देती है और पाकिस्तान को आतंकवादियों का गढ़ बताती है।पर क्या भारत सरकार ने यह सोचा है कि वो खुद क्या कर रही है, 2001 के संसद बलास्ट के आरोपी अफजल गुरू को भी अभी तक फाँसी नहीं दिला पाई भारत सरकार और मुंबई बलास्ट के आरोपी कसाब का भी लगता है कुछ वैसा ही हाल होने वाला है।अखबारों में यह खबर हमेशा मिलती है कि 26/11 के दोषियों पर कार्रवाई करने के लिए पाकिस्तान पर दबाव बनाएगा भारत।किस मुँह से भारत सरकार यह बात कहती है जब 26/11 के ही एक आरोपी अजमल कसाब को उसने देश का मेहमान बना के रखा हुआ है।आज कांग्रेस के महासचिव राहुल गाँधी देश में तरह-तरह की यात्राएँ कर रहे हैं और लोगों को भ्रष्टाचार मिटाने का पाठ पढ़ा रहे हैं, आखिर किस अधिकार से राहुल गाँधी गाँव-समाज में भ्रष्टाचार मिटाने और विकास की बातें कर रहे हैं जबकि एक आतंकवादी को, जिसकी वजह से कई मासुमों की जान चली गई, फाँसी नहीं दिलवा पाई उनकी सरकार।
     जरा सोचिए, याद कीजिए उनकी कुर्बानियों को जिनके वजह से आज मुंबई राहत की साँस ले रही है।मुंबई एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे, विजय सालस्कर, अशोक कामटे सहित और भी कई पुलिस अफसरों के कुर्बानियों और सफल प्रयासों के बदौलत ही मुंबई आतंक के चंगुल से छूट  पाने में सफल हो पाया था।जब घर में कोई बड़े-बूजुर्ग की प्राकृतिक कारणों से मृत्यु हो जाती है तब भी घर के सदस्यों को कितना दुख होता है।जरा सोचिए उनका क्या हाल हुआ होगा जिनके परिवार के सदस्य मुंबई बलास्ट में अकाल मृत्यु का शिकार हुए होंगे, जिन अफसरों ने देश के लिए अपनी जान दे दी उनके परिवार पर क्या बीती होगी।अपने परिवार की चिंता किए बगैर हेमंत करकरे सहित और भी कई पुलिस अफसरों ने अपने देश पर जान कुर्बान कर दी।उनको इज्जत और मान-सम्मान देने के बजाए सरकार के ही एक वरिष्ठ नेता ने शहीद हेमंत करकरे का एक गंदी राजनीति के तहत गलत इस्तेमाल करके खुद को सुर्खियों में लाना ज्यादा बेहतर समझा।यह भारत देश ही है जहाँ गंदी राजनीति इतनी हावी है कि इस राजनीति ने एक शहीद को भी नहीं छोड़ा।हमें शर्म आति है खुद को इस देश का नागरिक कहते हुए जहाँ एक शहीद की कुर्बानी की भी कोई इज्जत न हो।
     भारत सरकार अगर सचमुच मुस्लिम वोट बैंक के तहत कसाब को फाँसी नहीं दे रही है तो मुझे तरस आता है भारत सरकार की ऐसी बेवकूफी पर जो कि देश की आबादी के 15% मुस्लिमों को खुश करने के लिए एक आतंकवादी को फाँसी नहीं दे रही है।क्या शर्म नहीं आती भारत सरकार को कि एक गंदी राजनीति के तहत कई मासूमों के हत्यारे को उसने अब तक फाँसी नहीं दी।भारत सरकार अगर कसाब को फाँसी नहीं देती है तो शायद 15% में से 5% मुसलमान खुश भी हो जाएँ लेकिन अगर सरकार कसाब को फाँसी दे देती है तो देश की आबादी के 95% नागरिक सरकार के इस फैसले से खुश होंगे।5% ही शायद ऐसे होंगे जो इस फैसले से खुश न हो।अगर सरकार को विश्वास न हो तो वह कसाब की फाँसी पर देश भर में जनमत संग्रह कराले। अगर सरकार कसाब जैसे आतंकवादी को फाँसी नहीं दिला सकती तो पूरी भारत सरकार को इस्तीफा दे देना चाहिए। सरकार के कुछ मंत्री मुस्लिम वोट बैंक मजबूत करने के लिए हिंदू आतंकवाद पर बयान देते रहते हैं।अरे! मंत्रीजी पहले जो आतंकवादी गिरफ्त में है उसे तो फाँसी दिलवाईए फिर जाकर पूरे देश से आतंकवाद खत्म कीजिएगा।कसाब जैसे पापी को तो गिरफ्त में आने के 2-3 दिनों के भीतर ही सारी औपचारिकता पूरी करके फाँसी पर लटका देना चाहिए।आखिर क्या जरूरत है एक आतंकवादी का बेवजह कोर्ट में लंबा मुकदमा चलाकर कोर्ट का और देश का वक्त बर्बाद करने की।खैर अब तो लगता है कि अजमल कसाब का भी वही हाल होगा जो अफजल गुरू का हुआ है।
     मुंबई बलास्ट में शहीद हुए और बलास्ट के शिकार हुए लोगों की आत्माओं को भगवान शांति प्रदान करे।उन शहीदों की जान गई है पर उनकी कुर्बानी सदैव देश में याद रखी जाएगी।
    जय हिन्द! जय भारत!             

2 comments:

Dr. O.P.Verma said...

हमारी अपंग सरकार से और हम क्या उम्मीद कर सकते हैं। कसाव पर अलबेला खत्री जी ने शानदार कविता लिखी है।

मुबारक हो.....
मुबारक हो कसाब, तू जीत गया
भाग्य हमारा खराब, तू जीत गया
तू जीत गया हरामज़ादे !
भारत हार कर बैठा है
क्योंकि लोकतंत्र हमारा
कुंडली मार कर बैठा है
खोद ! खोद ! ख़ूब कब्र तू हमारी खोद !
तेरे तो दोनों हाथों में लड्डू हैं चादरमोद !
जब तलक ज़िन्दा रहेगा, जेल में आराम फ़रमायेगा
वीआईपी हत्यारा है न,
मन चाहा पिएगा - मन चाहा खायेगा
और कहीं सचमुच फांसी हो गई तो शहीद कहलायेगा
हाँ हाँ शहीद कहलायेगा तू अपने मुल्क नापाक का
एक एक बाल पुज जायेगा हरामखोर तेरी नाक का
हम तो भारतीय हैं
जंग में चाहे कितने बहाद्दुर हों, घर में तो पांगु हैं
क्योंकि स्वभाव से ही दयालु अर्थात डान्गु हैं
इसीलिए तुझ जैसे आंडू-पांडू भी हमें छील डालते हैं
और हमारे हरे-भरे घरों को दिनदहाड़े लील डालते हैं
काश !
काश !
सूअर की औलाद ...काश ! तू मेरे हाथ लग जाये......
वो करूँ तेरे साथ मैं....
कि तेरे मुर्दा पुरखे भी तड़प कर कब्रों में जग जाये .....
मैं तुझे फांसी नहीं दूँ
गोलियां भी नहीं मारूं
क्योंकि मौत तेरे लिए सज़ा नहीं मज़ा है
मौत मिल जाये ये तो ख़ुद तेरी भी रज़ा है
मैं तो तुझे ज़िन्दा रखूं ............
ज़िन्दगी भर गधा बना कर रखूं
और तेरी सवारी करूँ
चिलचिलाती धूप में, दहकती हुई सड़क पर,
नंगे पाँव, नंगे बदन, जब मेरा बोझ ढोयेगा
तो गधे के बीज ! तू ख़ून के आँसू रोयेगा
मैं तो रात - दिन तुझे कोल्हू पर लगा कर दौड़ाऊँ
सरसों के साथ साथ तेरा भी थोड़ा तेल निकलवाऊं
बहुत कुछ करना चाहता हूँ मैं तेरे साथ कमीने !
तुझ शैतान की संतान ने हमारे सुख-चैन छीने
लेकिन अफ़सोस रे.................................
अफ़सोस !
तू तक़दीर का बादशाह है, मुकद्दर का धनी है
सज़ा और वो भी कड़ी ? तेरे लिए कहाँ बनी है ?
उज्ज्वल निकम खुश हैं
क्योंकि पूरा भारत ख़ुशफ़हमी में पटाखे छोड़ रहा है
वो तो अलबेला खत्री पगला है जो माथा फोड़ रहा है
उड़ा उड़ा.........
ख़ूब मज़े उड़ा............
पहले वारदात करके सैकड़ों को मारा
और अरबों रुपयों का नुक्सान किया
अब तेरे रखरखाव
और सुनवाई पर करोड़ों खर्च हो रहा है
यानी सब कुछ तेरे ही हक़ में हो रहा है
पाकिस्तान खड़ा खड़ा मुस्कुरा रहा है
क्योंकि उसका
एक मामूली लौंडा भी गज़ब ढा रहा है
पूरी पलटन का काम तू अकेला कर रहा है
और नुक्सान .....हिन्दुस्तान का अवाम भर रहा है
लगा रह चादरमोद ! लगा रह ...........
तुझे हक़ है..हक़ है पाकिस्तान में पैदा होने का
काश !
हमें भी मौका मिल जाये वतन पे शैदा होने का
छोड़ो अलबेला ...........
जाने दो....
कौन सुनता है ?

Dr. O.P.Verma said...

मेरा एक काल्पनिक पोस्ट कसाव के बारे में

दिनांक 15 जुलाई, 2019 आज की सबसे बड़ी खबर

आप सब जानते हैं कि आज हिन्दुस्तान विश्व की सुप्रीम पावर है और विश्व के सारे हाई प्रोफाइल केसेज़ हिन्दुस्तान के न्यायालय ही देखते हैं। आज का दिन हिन्दुस्तान के लिए अति विशेष दिन है। आज का दिन विश्व के इतिहास में दर्ज हो चुका है। इसे सदियों तक पढ़ा जायेगा। आज आमिर अजमल कसाव, जिनको कुछ साल पहले फांसी की सजा सुना दी गई थी, को हिन्दुस्तान के विशेष न्यायाधीश के सामने फांसी पर लटका दिया गया।

आमिर अजमल कसाव पर इल्जाम था कि इसने पाकिस्तानी सरकार, आतंकवादी संगठन और आई एस आई द्वारा मुम्बई शहर को तबाह करने और आतंक फैलाने के लिए रचे गये आतंकवादी हमले को अंजाम देने में मुख्य भूमिका निभाई और सैंकड़ों निर्दोष लोगों को ए के 47 की गोलियों से भून डाला।

कसाव की सजा में यह प्रावधान भी था कि फांसी लगने तक कसाव मुम्बई के एक ऐसे परिवार के साथ रहेगा जिसके एक से ज्यादा लोग आतंकवादी घटनाओं में मारे गये हों। कसाव को उस परिवार के सारे कार्य करने का, परिवार के लोगों की सेवा चाकरी करने का आदेश था। बिग बॉस की तर्ज पर इस परिवार के घर के हर कमरे में वीडियो कैमरा लगाने और कसाव द्वारा इस परिवार की सेवा चाकरी करने, उस परिवार की सारी पीड़ा और कष्ट दर्शाने वाले सारे दृश्यों का लाइव टेलीकास्ट करने का आदेश भी न्यायाधीश ने दिया। ताकि पाकिस्तान के सारे आतंकवादी ये दृश्य देखें और महसूस करें कि उनकी गोलियों से मरने वाले लोगों के परिवार वालों को कितनी पीड़ा और कष्ट होता है। न्यायाधीश ने पाकिस्तान के सारे नेताओं और आतंकवादी संगठनों के आकाओं को भी मुम्बई में आतंकवादी हमले की योजना बनाने के जुर्म में एक महीने के लिए दिल्ली की जामा मस्जिद के सामने फुटपाथ पर मोचियों की तरह बैठ कर लोगों के जूते पॉलिश करने की सजा सुनाई।