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16.12.11

एक ही कमरे में चलती है एक से पांच तक की कक्षा

शंकर जालान


कोलकाता । राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद कांग्रेस-तृणमूल कांग्रेस की नई सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में कई बदलाव लाने की घोषणा की थी। मसलन सरकारी शिक्षकों को पहली तारीख को वेतन देने का मामला हो या प्रेसिडेंसी कॉलेज में मेंटर ग्रुप की गठन की बात। विश्वविद्यालय के शिक्षकों पर निगरानी रखने का मसला हो या फिर पाठ्यक्रम में बदलाव की जरूरत महसूस की गई हो। अफसोस की बात यह है कि शिक्षा की नींव पर राज्य सरकार के शिक्षा विभाग की निगाह नहीं जा रही है। इसका जीता जागता उदाहरण हैं कोलकाता नगर निगम द्वारा संचालित स्कूलों की बदहाली। ध्यान देने की बात है कि सरकारी दावे के बावजूद राज्य में प्राथमिक शिक्षा की व्यवस्था अत्यंत्र लचर है। नगर निगम द्वारा संचालित स्कूल में एक कमरे में ही कक्षा एक से पांच तक की पढ़ाई हो रही है जानकारों का कहना है कि राज्य सरकार को समझना चाहिए कि उच्च शिक्षा के साथ-साथ प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में भी व्यापक सुधार व बदलाव की जरूरत है।
कोलकाता नगर निगम द्वारा संचालित स्कूलों की स्थिति बदतर है। ऐसा ही एक स्कूल है वार्ड नंबर 44 में। इस स्कूल में प्रात:कालीन उर्दू माध्यम की पढ़ाई होती है यहां सुबह छह से दस बजे तक उर्दू पढ़ाई जाती है। द्वितीय पाली यानी दिन के ग्यारह बजे से शाम चार बजे तक हिंदी माध्यम के छात्रों को शिक्षा दी जाती है। द्वितीय पाली में कक्षा एक से पांच तक की पढ़ाई होती है और कुल 46 छात्र-छात्रों को अक्षर ज्ञान दिया जाता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि ज्यादातर दिन एक भी बच्चे स्कूल नहीं आते और दोपहर का भोजन (मीड डे मील) बनाया जाता है, जो शिक्षक व आया के काम आता है।
इस बाबत स्कूल के प्रधानाध्यापक ने बताया कि ऐसा कभी नहीं हुआ कि एक भी बच्चा स्कूल नहीं आया हो। उन्होंने स्वीकार किया तो छात्र-छात्राओं की उपस्थिति कम जरूर रहती है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि संख्या शून्य के स्तर तक आ जाती हो। उन्होंने अपनी समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि बीते कई महीनों से मैं अकेले स्कूल चला रहा हूं। मसलन दोपहर के भोजन की व्यवस्था करनी हो या गैस सिलेंडर बुक करना हो। बच्चों को पढ़ाना हो या परीक्षा की कॉपियों की जांच करनी हो सब काम मुझे करना पड़ रहा है। स्कूल की सारी जिम्मेवारी उनके कंधे पर है।
आप स्थानीय पार्षद रेहाना खातून या नगर निगम में शिक्षा विभाग के मेयर परिषद की सदस्य शशि पांजा से शिकायत क्यों नहीं करते? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि पार्षद से कई बार कहा और उन्होंने कोशिश भी की लेकिन कामयाबी नहीं मिला। इसके कारण का खुलासा करते हुए प्रधानाध्यापक ने कहा कि शशि पांजा मेयर परिषद की सदस्य होने के साथ-साथ विधायक भी हैं। इसलिए उन पर काम का दबाव बढ़ गया है। इस वजह से वे इस ओर ध्यान नहीं दे पा रही हैं।
उन्होंने बताया कि स्थानीय पार्षद रेहाना खातून ने पुरजोर कोशिश कर इस विधायक के लिए दो महीने पहले एक शिक्षक की नियुक्ति कराई थी, लेकिन यह शिक्षक भी बीमार होने के कारण बीते कई दिनों से स्कूल नहीं आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी स्कूल में बच्चों की संख्या कम है, लिहाजा में और अधिक शिक्षक की मांग नहीं कर सकते। उन्होंने बताया कि यहां एक ही कमरे में कक्षा एक से पांच तक की पढ़ाई होती है। एक ही ब्लैक बोर्ड (श्यामपट) पर सभी बच्चों के लिए सवाल लिखे जाते हैं, जो बच्चों के लिए परेशानी का सबब है। इस बाबत स्थानीय पार्षद रेहाना खातून ने बताया कि स्कूल की तमाम समस्याओं से वे भली-भांति अवगत हैं। अगले महीने यानी नए साल में वे प्रधानाध्यापक के साथ इस बाबत विचार-विमर्श करेंगी और घर-घर जाकर लोगों से उनके बच्चों को विद्यालय भेजने का अनुरोध भी करेंगी।

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