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31.1.12

नेता जी क्या कहते हैं ?






नेता जी क्या कहते हैं ? 


जिस जनता की खातिर 
हम तिल-तिल कर हैं मरते ,
सरकारी गाड़ी में हम 
दौरे करते फिरते ;
वो जनता जब  देती  ताने 
वो भी सहते हैं ,
नेता जी क्या कहते हैं ?

वोट के बदले नोट हैं देते 
उन्हें पिलाते दारू ,
सत्ता-दूध इसी से मिलता 
जनता गाय दुधारू ;
ये जो रूठे;सपने टूटे 
आंसू बहते हैं ,
नेता जी क्या कहते हैं ?

मीठे-मीठे भाषण देकर 
झूठे करते वादे ;
घोटाले करते रहते 
वैसे हैं सीधे-सादे ;
सत्ता पाकर सत्ता-मद में 
डूबे रहते हैं ;
नेता जी क्या कहते हैं ?

ए. सी. रूम  के भीतर  
नीति  निर्धारित करते 
लूट के जनता का पैसा 
अपने घर में भर लेते ;
जनता जूते मारे तब भी 
हम हँस देते हैं ;
                                                     शिखा कौशिक 

4 comments:

I and god said...

कविता हमेशा कि तरह बहुत अच्छी है,
तुम में प्रतिभा है ,
पर क्या तुम्हारे पास इस सोई हुई जनता को जगाने का कोई मन्त्र है !

I and god said...

कविता हमेशा कि तरह बहुत अच्छी है,
तुम में प्रतिभा है ,
पर क्या तुम्हारे पास इस सोई हुई जनता को जगाने का कोई मन्त्र है !

शिखा कौशिक said...

ASHOK JI-ONLY THIS MANTRA CAN DO WOUNDER -''LISTEN YOUR SOUL BEFORE DOING ANYTHING ''.

I and god said...

बड़ी गहरी बात है, मेरे जैसे व्यक्ति के लिए इसका अर्थ निकालना कठिन हैं

फिर भी धन्यवाद , उक्तर के लिए.