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19.6.12

...तो और ऊंचा करना होगा आसमानों को

- अतुल कुशवाह
सियासत उनके डीएनए में है और कूटनीति उनका कर्म। देश 13वें राष्टÑपति का स्वागत करने को तैयार है, लेकिन इसमें अभी वक्त है। हालांकि अभी पता ही नहीं कि यह प्रथम नागरिक कौन होगा। जिस तरह से देश में महामहिम पर महाभारत हो रही है, उसे देखकर तो लगता है कि डा.एपीजे अब्दुल कलाम जैसे लोग सियासत से दूर ही रहें वही अच्छा है। स्पष्ट कर दूं कि मैं राजनीति को दोष नहीं दे रहा, बल्कि छद्म राजनीतिज्ञों पर उंगली उठा रहा हूं। यह सच है कि अब्दुल कलाम मंझे राजनीतिज्ञों की तरह सियासत की शहनाइयां नहीं बजाते, लेकिन उनकी सोच देश के भविष्य को लेकर हमेशा एक नई ऊर्जा का निर्माण करती रहती है। डा. कलाम सभी पदों से हमेशा ऊपर रहेंगे। उनकी जिंदगी का त्याग और पावन विचारधाराएं हिंदुस्तान ही नहीं, पूरी दुनिया में अविरल बहती रहेंगी। जिसने रामेश्वरम में रेलवे स्टेशन पर अखबार बेचकर आकाश नाप डाला हो, सियासत उसके लिए कुछ भी नहीं है। देश के युवाओं के आदर्श और हिंदुस्तान को मिसाइल की नयी परिभाषा सिखाने वाले डा. कलाम के लिए दो शब्द:
देखना है अगर इनकी उड़ानों को,
तो और ऊंचा करना होगा आसमानों को।।
........सियासत से तौबा करते हुए कभी किसी शायद ने लिखा-
खुदा महफूज रखे मेरे बच्चों को सियासत से
ये वो औरत है जो उम्रभर पेशा कराती है।।

2 comments:

10jan said...

kash tumhari jaisa sochna aur chijo ko samjna mujhe bhi aa jaye. has taou iu writting is very nice god blees u. bt ek chij tumari mujhe acchi nahi lagi jo tumne niche women se judi line likhi h. sabhi ko ek hi taraju m taulna sahi nahi .

atul kushwah said...

Maaf kijiye, mera irada kisi ka dil dukhane ka nahi tha..ye dard ke dastavej hain jo srajan ki hawa me farfarane lagte hain...aapke bahumulya pratikriya ke liye aabhar..mera blog
http://atulkavitagajal.blogspot.in/