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21.12.12

धर्म आराधना के साथ राष्ट्र सेवा: देश के रँगे हुए सियार

धर्म आराधना के साथ राष्ट्र सेवा: देश के रँगे हुए सियारदोस्तों पुरे देश में एक ज्वाला भड़का हुआ है और ये हमारे देश और खुद हमारा बोया हुआ आग है जो आजसबको जला रहा है  आज जो धरना प्रदर्शन हो रहा है और युवा साथी और बहने भाग ले रही है देख के तोदिल में उम्मीद आती है लेकिन बस कैमरे पर अपनी छवि के अलावा इनमे सच का कोई भी गुस्सा याप्रतिशोध नहीं है इस घटिया समाज पर और ये खुद जो आज प्रदर्शन कर रहे है वो ही इसको बढ़ावा देने काकाम करते है इनको देशी शब्द और राष्ट्रीयता से उतना ही चिढ है जितना की एक सांड लाल कपड़ो सेचिढ़ता है  इस से पहले की आप मुझे गाली दे या फिर कुछ बोले मैं आपको कुछ दिखाना चाहूँगा 

1) अमेरिका में हर साल तकरीबन 96000 बलात्कार होते है और प्रति 100000 तकरीबन 33 बलात्कार होतेहै 
2) ब्रिटेन में हर साल तकरीबन 16000 बलात्कार होते है और प्रति 100000 उनका आंकड़ा तकरीबन 29 है 
3) आस्ट्रेलिया में हर साल तकरीबन 19000 बलात्कार होते है और प्रति 100000 उनका आंकड़ा तकरीबन92 के करीब आता है 
4) बेल्जियम में हर साल तकरीबन 3000 बलात्कार होते है और उनका प्रति 100000 आंकड़ा 29 आता है 
वैसे ही हर एक पश्चिमी और यूरोपीय देशो में बलात्कार बड़े पैमानों पर होती है और वो इसके लिए गंभीरभी नहीं है क्यूंकि उनके समाज में खुलापन है और वो इस से इतना चिंतित भी नहीं है 
अब जरा आइये अपने देश की स्थिति समझते है 
80 के दशक में हमारे देश में प्रति साल बलात्कार 700 और प्रति 100000 ये आंकड़ा करीब 0.17 आता था 
90 के दशक में हमारे देश में प्रति साल बलात्कार 1800 और और प्रति 100000 ये आंकड़ा करीब 0.70 आताथा 
2000 के दशक में यही बलात्कार का आंकड़ा बस दस सालो में ही बढ़कर अचानक ही 6000 और प्रति100000 ये आंकड़ा करीब 1.6  गया 
और 2008 में यही आंकड़ा 6000 से बढ़कर करीब 9000 हो गया और प्रति 100000 ये आंकड़ा करीब  1.9करीब  गया और अभी वर्तमान में हमारे देश में एक साल में कम से कम 19000 बहनों के साथ ऐसाकुकर्म होता है और प्रति 100000 ये आंकड़ा करीब करीब 2.5 के पर जा चूका है फिर भी ये पश्चिमी देशो केमुकाबले बहुत ही कम है और आज के हमारे यही युवा जो फेसबुक और रोड पर और इंडिया गेट पर हाथ मेंमोमबतिया लेके खड़े रहते है और लगता है की हमारे देश में कितने सुसंस्कृत युवा रहते हैलेकिन इन रँगेहुए सियारों को कोई जनता नहीं है की जब जिस्म और मर्डर फिल्म आती है और कोई भी फिल्म जो कीसमाज में अपने परिवार वालो के साथ नहीं देख सकते है तब आप देखेंगे की ये ही रँगे हुए सियार वह भीड़बनाये हुए है चाहे वो गूगल पर सन्नी लिओनि का सर्च हो या पूनम पाण्डेय और शर्लिन चोपड़ा केफोल्लोवेर्स हो सब यही है नहीं तो इन दो टेक की लडकियों की क्या औकात थी की ये पुरे भारत मेंलडकियो के प्रति सोच ही बदल के रख देती लेकिन ये हमारे रँगे हुए सियार ही है जो इन्हें आँखों औरपलको पर बैठाते है अगर ये फिल्मे  देखते तो इन फिल्मो के जो भांड निर्माता फिर से हिम्मत नहीं करतेलेकिन वो जब देखते है की हमारे देश के युवा को बस सेक्स चाहिए तो वो वही बनाते है क्यों सामाजिकमुद्दे पर फिल्मे फ्लॉप हो जाती है और बस उन्हें समाज का एक छोटा सा वर्ग ही पसंद करता है और क्योंएक छिछोरे से इन्सान को सुपर स्टार बना दिया जाता है वो इमरान जिसे एक सीधा संवाद बोलने नहींआता वो आज का सुपर स्टार है क्यों बस इन्ही सियारों के वजह से कई ऐसी गन्दी लड़किया जिन्हें सभ्यसमाज में देखना भी एक शर्म है वो आज टीवी और फिल्मो में आती है और तमाम विज्ञापनों में आती हैक्यूंकि विज्ञापन बनाने वाला जनता है की इसका उपयोग युवा ही करता है और आज तो चाहे वो साबुन होया खाने का कोई सामान या फिर पूजा या फिर कपडे का कोई विज्ञापन उसमे इतनी अश्लीलता परोसीजाती है क्यों क्यूंकि हम वही देखना पसंद करते है और इसी लिए वो बनते है हमें याद रखना चाहिए कीकिसी भी समाज को वही माहौल मिलता है जैसा की वो खुद चाहता है क्या हमने आज तक किसी अश्लीलफिल्म को फ्लॉप करवाया है नहीं ? हम क्या गन्दी औरतो को अपना स्टार क्यों बनाते है ? हम बिग बॉसऔर रोडीज जैसे प्रोग्राम देखते है क्यू ? 
क्यूंकि हम पर पश्चिमी सभ्यता एक दम जादू कर रखा है हम हर एक लाइन में cool, chill, fun  और enjoy बोलते ही है हमें सीधापन पसंद नहीं है सीधा सा देहाती बोल के आपको बगल कर दिया जाता है। तोजब हम पश्चिमी सभ्यता को सर पर चढ़ाएंगे तो उसी ने अनुसार बलात्कारऔर हमारी मानसिकनैतिकता का तो गिरना ही है तो फिर ये झूठा प्रदर्शन क्यों ? ये दोगलापन क्यों जब आप खुद ही आधुनिकबन ने का भुत है तो फिर आप खुद समाज में ये गंदगी फैला रहे हो और अब प्रदर्शन तो मत करो 
अगर थोडा सा भी बदलाव महसूस किया हो ये पढ़ के तो कसम ले लो की आज के बाद  ही कोई c ग्रेडस्टार की d ग्रेड फिल्म देखेंगे  ही पश्चिमी सभ्यता के पीछे भागेंगे अपनी संस्कृति ऐसे ही पूरी दुनिया मेंबेजोड़ है कहा गया वो दौर जब पूर्व और पश्चिम टाइप की फिल्मे बनती थी हम ही इस देश का भविष्य हैऔर हमें ही तय करना है की कैसे समाज में हमें रहना है 
~~ अक्षय 

2 comments:

Dr Om Prakash Pandey said...

janataa to aisee hee hotee hai , chaahe bholee kaho ya bewakoof . naitikataa shaashankartaa ke dwara dand ke samyak prayog se hee aatee hai .

Akshay kumar ojha said...

sahi bole pandey sir :) lekin jo yuva mere jaise hai aur jake waha chillate hai aur ghar aake kuch din me wahi kam karenge jis se desh me ashlilta ko badhawa mile to un siyaro ko kya