Bhadas ब्लाग में पुराना कहा-सुना-लिखा कुछ खोजें.......................

27.1.13

दलित, पिछड़े सबसे भ्रष्ट..!


गणतंत्र दिवस पर समाजशास्त्री आशीष नंदी ने अपने विचारों के गणतंत्र से  नया भूचाल पैदा कर दिया। आशीष नंदी कहते हैं कि भारत में दलित और पिछड़े ही सबसे ज्यादा भ्रष्ट हैं..! नंदी साहब इसके पीछे पश्चिम बंगाल का एक उदाहरण भी देते हुए कहते हैं कि पश्चिम बंगाल में पिछले 100 सालों में दलितों और पिछड़ों को सत्ता के नजदीक आने का मौका नहीं मिला इसलिए वहां पर भ्रष्टाचार कम हैं..!
आशीष नंदी साहब की बात अगर सही है फिर तो इसका एक और मतलब ये निकलता है कि भ्रष्टाचार का जीन तो दलितों और पिछड़ों के खून में है और फिर तो ये बड़ी ही खतरनाक स्थिति है..!
ऐसे में तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को तत्काल अपने मंत्रिमंडल से दलित और पिछड़े वर्ग के मंत्रियों को निकाल बाहर करना चाहिए..!
लोकसभा अध्यक्ष पद से मीरा कुमार को हटा देना चाहिए..!
सरकार को सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त कर देना चाहिए..!
सरकार को दलितों और पिछड़ों के लिए चलाई जा रही सारी योजनाओं पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा देनी चाहिए..!
आशीष नंदी साहब आपने तो कमाल कर दिया...जिस भ्रष्टाचार रूपी कैंसर को खत्म करने में बड़े-बड़े नाकाम हो गए आपने तो उसकी जड़ ही पकड़ ली..! आपकी बात पर अमल करते हुए सरकार को तो अब भ्रष्टाचार की जड़ को ही उखाड़ फेंकना चाहिए ताकि भारत से भ्रष्टाचार खत्म हो जाए..!
नंदी साहब आप तो समाजशात्री और आलोचक ठहरे...भ्रष्टाचार पर आपने चिंता की बड़ा अच्छा लगा लेकिन आपने तो दलितों और पिछड़ों पर ही सवाल खड़ा कर दिया। माना साहित्य सम्मेलन हर मुद्दे पर खुली चर्चा के लिए होता है लेकिन आपने तो अपनी जुबान कुछ ज्यादा ही खोल दी। आपने सफाई भी पेश कर दी...माफी भी मांग ली लेकिन क्या इतने भर से आपकी जुबान से छूटे दलितों और पिछड़ों के अपमान के तीर वापस हो जाएंगे..?
नंदी साहब भ्रष्टाचार किसी के खून में नहीं होता और न ही इसका किसी धर्म या जाति से कोई लेना देना है। भ्रष्टाचार तो नेता(सभी नहीं) भी करते हैं, अधिकारी- कर्मचारी(सभी नहीं) भी करते हैं, छोटे-बड़े व्यापारी(सभी नहीं) भी करते हैं, आम आदमी(सभी नहीं) भी करते हैंलेकिन आपने तो भ्रष्टाचार की जाति और वर्ग ही तय कर दिया..!
पैसे पर जिसकी नीयत खराब हो जाती है नंदी साहब वो ही भ्रष्टाचारी हो जाता है बस भ्रष्टाचार करने के तरीके अलग – अलग होते हैं...कोई ज्यादा करता है तो कोई कम करता है।
चलिए नंदी साहब आपने अपने कहे पर सफाई भी दे दी, माफी भी मांग ली, आपके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हो गई...आखिर जयपुर साहित्य सम्मेलन की सारी सुर्खियां भी तो आपने बटोर ही ली...इस बात का तो संतोष होगा ही आपको..! आजकल तो ट्रेंड भी है इसका।

deepaktiwari555@gmail.com

No comments: