Bhadas ब्लाग में पुराना कहा-सुना-लिखा कुछ खोजें.......................

9.8.13

सियार के बारे में ..............

सियार के बारे में ..............

मुझे खेद है कि मैं सियारों पर अपूर्ण जानकारी दे रहा हूँ ,पाठक वर्ग इसमें एक
नया खंड टिपण्णी के रूप में जोड़ कर अन्य पाठकों की ज्ञान वृद्धि कर सकते हैं।

सियार भी एक अजीब बला है जंगल में. इनके कारनामे और करतूतें थूकने के योग्य
है। सियार की एक खासियत यह होती है कि जब जंगल की व्यवस्था उसके हाथ में
आ जाती है तब वह सबसे पहले शेरों की जान को खतरा पैदा करता है,यह सियारों
का पारिवारिक रिवाज है जो इनके जन्म से जुड़ा है।  

       सियार जंगल में सर्वत्र पाए जाते हैं अक्सर ये राज नगर में निवास करना ज्यादा
पसंद करते हैं .इनका कोई उसूल नहीं होता है.ये खुदगर्जी के उसूल पर पलते हैं.
ये अपनी खाल बचाने के लिए शेरों का शिकार पडोसी भेड़ियों से करवा देते हैं।

सियार रंग बिरंगे होते हैं.इनकी पहचान बिरला ही  कर पाता है क्योंकि ये अपनी
खाल को मनचाहे रंग में रंगने में माहिर होते हैं.इनका कोई धर्म या सिद्धांत नहीं होता
है इनके पाप अक्सर पुण्य में बदल जाया करते हैं।

        सियारों की आपसी लड़ाई के किस्से जंगल में हर वक्त उछलते रहते हैं मगर
जब इनकी अस्मिता पर खतरा मंडराता है तो यह सारी जमात न्यात जात भूल
कर एक हो जाती है इसी विशिष्ठता के कारण गायें और कबूतर इनको जंगल का
राजा बनाते हैं। 

    सियार दहाड़ नहीं सकते ये इनकी मज़बूरी है इसलिए इनसे दहाड़ मारने की
अपेक्षा ना करे,ये जाती मुँह उठाकर रो सकती है ,इनको आप दुसरो के जंगलों
में भी रोते देख सकते हैं.सियार आक्रमण भी करते हैं पर अपने ही जँगल में
दुश्मनों से ये भयभीत रहते हैं.

 कुछ चतुर सियार गूंगे सियार भी पालते हैं ताकि सही वक्त पर गूंगे बने रहे
और कुछ सियार बहरे सियार पालते हैं ताकि सत्य की आवाज ना सुन सके।
चतुर सियार दूर से मूढ़ सियार के कंधे पर शस्त्र रख खुद प्रहार करते हैं। 

सियार वैसे तो अपना पेट भरने की जुगत में सालों लगे रहते हैं परन्तु कभी
कभी बेतरनी पार करने के अवसर पर गायों और कबूतरों को विशेष दाना
डालते हैं।

सियार कूटनीति में माहिर होते हैं। जंगल के प्राणियों में फसाद कराने में इनको
महारत हासिल होती है। ये जब भी रोते हैं पुरे जंगल में आपदा प्रबन्धन हो जाता
है। अपने जँगल को बेच खाने में ये माहिर होते हैं। ये विपदाओं से अपनी रक्षा का
प्रबन्धन करने में निपुण होते हैं इसलिए अपनी पीढ़ियों तक का भोजन दुसरे
जंगलों में सुरक्षित रखते हैं।

सियार अपने जँगल के हितेषी नहीं होते हैं मगर बहरूपिया बन सबको झांसा देते
रहते हैं। इनकी खाल मोटी होने के कारण इनको पाप के प्रभाव से बचाती है। इनका
शिकार करने का मौका सालों में कभी कभार मिलता है पर देखा यह गया है कि ये
शिकारी को धोखा देकर सकुशल अपने मुकाम लौट आते है। 
 
         

1 comment:

Dinesh Singh said...

अति सुंदर रचना ।
आपने तो सियारों की पूरी पोल खोल दी ।
धन्यवाद